राजस्थान सरकार ने तबादलों की छूट 10 जुलाई तक बढ़ा दी। अब सभी विभागों की ट्रांसफर सूची CMO की मंजूरी के बाद ही जारी होगी। सरकार ने पारदर्शिता और निगरानी सख्त की।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर लगी छूट की अवधि पांच दिन बढ़ाकर अब 10 जुलाई तक कर दी है। पहले यह अवधि 5 जुलाई तक थी। सरकार का कहना है कि कई विभागों में प्रशासनिक कारणों से तबादला प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। इसी बीच तबादलों को लेकर उठे विवाद और पारदर्शिता पर सवालों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपने हाथ में ले ली है। अब किसी भी विभाग की तबादला सूची जारी होने से पहले CMO की मंजूरी अनिवार्य होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों, प्रभावशाली सिफारिशों या राजनीतिक दबाव के आधार पर तबादले नहीं होंगे। प्रत्येक मामले की प्रशासनिक आवश्यकता और कार्य प्रदर्शन के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
IAS विवाद के बाद सरकार और सतर्क
हाल ही में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और कुछ आईएएस अधिकारियों के बीच तबादलों को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। डॉ. बैरवा ने अपने अधीन परिवहन, उच्च शिक्षा और आयुष विभागों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनकी पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी ट्रांसफर या पोस्टिंग आदेश जारी नहीं होगा।
इस घटनाक्रम के बाद सरकार ने पूरे तबादला तंत्र को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की रणनीति अपनाई है।
मंत्रियों के बंगलों पर बढ़ी भीड़
तबादलों से बैन हटने के बाद मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं के आवासों पर कर्मचारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। प्रदेशभर से कर्मचारी पसंदीदा पोस्टिंग के लिए सिफारिशें लेकर पहुंच रहे हैं। कई कर्मचारी एक ही तबादले के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों से कई 'डिजायर' लगवा रहे हैं। सबसे अधिक मांग शिक्षा, पुलिस, ऊर्जा, नगरीय विकास, वित्त और राजस्व विभागों में देखी जा रही है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), नगर निगम, यूआईटी और अन्य प्रमुख संस्थानों की पोस्टिंग को लेकर सबसे ज्यादा दबाव बताया जा रहा है।
मंत्री बोले- नहीं चलेगा जुगाड़
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि इस बार तबादलों में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों और वास्तविक जरूरत वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी कहा कि सीएमओ की निगरानी से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।