राजकॉम्प के चेयरमैन अखिल अरोड़ा के खिलाफ एसीबी की जांच का पत्र भी अफसरों ने दबाया
यही नहीं इसी राजकॉम्प में वीडियो वॉल टेंडर और अन्य मामलों को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राज्य सरकार से तत्कालीन आरआईएसएल चेयरमैन अखिल अरोड़ा के खिलाफ सरकार को पत्र लिखकर अनुसंधान की अनुमति मांगी थी। लेकिन नई सरकार आने के बाद विभाग में उनके चहेते अफसरों ने इस जांच पत्र को रफा-दफा कर दिया।
एडिशनल चार्ज पर सालों से जमे, एक ही सीट पर लगातार प्रमोशन
महकमे में काम कर चुके बड़े न सिर्फ नौकरशाहों की भूमिका संदेह के घेरे में है। बल्कि उनके आशीर्वाद की छाया तले यहां लंबे असरे से जमे कुछ खास अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जीरो टॉलरेंस का दावा कर सत्ता में आई नई बीजेपी सरकार में भी ये उसी तरह जमे हुए हैं। यही नहीं एक ही सीट पर लगातार इन अफसरों को प्रमोशन भी दिया जाता रहा। इसके साथ ही इन अफसरों को खुश करने के लिए अन्य सेवाओं से आईएएस में स्पेशल सेलेक्शन के लिए भी इनके नाम आगे किए गए। राजकॉम्प में डॉयरेक्टर फाइनेंस नीलेश शर्मा लंबे समय से जमे हुए हैं। साल 2014 से 2019 तक इनके पास डीओआईटी के डायरेक्टर फाइनेंस का चार्ज था। इसके बाद साल 2021 से फिर से इन्हें राजकॉम्प में डायरेक्टर फाइनेंस का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। विभाग में एक ही अफसर पर इस तरह की मेहरबानी सवाल खड़े करती है।
कैसे बना राजकॉम्प भ्रष्टाचार का अड्डा, दूसरे विभागों के टेंडर भी लिए
अन्य विभागों के भी कार्य जो कि वे खुद करने में सक्षम थे, उन्हें भी राजकॉम्प को दिया गया। चाहे वह वित्त विभाग से संबंधित निविदाएं हों, ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूशन, बाहर की कंपनियों से कांट्रेक्ट करना हो। यहां तक की आईएफएमएस 3.0 प्रोजेक्ट में एक ही व्यक्ति को अलग-अलग पदों पर दिखकर भी यहां भुगतान उठा लिए गए। बीजेपी विपक्ष में थी, तब इस विभाग में हो रही गड़बड़ियों को लेकर लगातार एसीबी जांच करवाए जाने की मांग की। एसीबी ने सरकार को राजकॉम्प के कई प्रोजेक्टों की जांच के लिए पत्र भी लिखे हैं। इसमें ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनकी लागत कई गुना बढ़ा दी गई।
एलईडी आउटडोर वीडियो वॉल 12 करोड़
योजना को आगे बढ़ाया और सभी ब्लॉकों में एलईडी आउटडोर वीडियो वॉल लगाने के लिए 85 करोड़ का प्रोजेक्ट बना दिया गया। राजनेट प्रोजेक्ट के तहत सप्लाई इंस्टालेशन एंड मेंटिनेंसऑफ आरएफ लिंक एंड आउटडोर वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट का प्रोजेक्ट निकाला। इसकी अनुमानित लागत 140 करोड़ रुपये आंकी गई। बाद में प्रोजेक्ट की लागत बढ़ाकर 240 करोड़ रुपये कर दी गई, करीब 2 हजार करोड़ रुपए का राजनेट। इनके अलावा 640 करोड़ रुपये के ई-मित्र प्लस मशीन प्रोजेक्ट, 150 करोड़ रुपये का मैन पावर हायरिंग प्रोजेक्ट, ई-मित्र एटीएम, भामाशाह डिजिटल पेमेंट किट में भी राजकॉम्प पर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं, जिसकी जांच के लिए लिए एसीबी ने गृह विभाग को पत्र लिखा था। यही नहीं दूसरे विभागों की सब्सिडी डिस्ट्रीब्यूशन के काम भी राजकॉम्प ने अपने हाथ में लेने की भरपूर कोशिशें की। लेकिन पिछली सरकार ने एन वक्त पर कुछ आदेशों में संशोधन कर दिया।