वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत
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बताते चलें कि राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज चला रहा है। इसके साथ ही पिछले 20 साल का वोटिंग ट्रेंड यह भी कहता है कि जब भी मतदान प्रतिशत घटा है तो इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिला है। जबकि मतदान प्रतिशत बढ़ने का फायदा बीजेपी को मिला है। इस बार चुनाव में 5.25 वोटर्स थे और 1862 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। अब तीन दिसंबर को नतीजे आएंगे।तब पता चल सकेगा कि राजस्थान में रिवाज कायम रहता है या गहलोत सरकार परंपरा को तोड़ पाती है?
बताते चलें कि राजस्थान में कुल 200 सीटें हैं। लेकिन वोटिंग 199 सीटों पर हुई है। राज्य में 2013 और 2018 में भी 199 सीटों पर मतदान हुआ था। इस साल चुनाव के बीच श्रीगंगानगर जिले की करणपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार गुरमीत सिंह कूनर (75 साल) का निधन हो गया। ऐसे में चुनाव आयोग ने मतदान स्थगित कर दिया था। कूनर ने चार नवंबर को नामांकन भरा था। अब यहां उपचुनाव कराए जाएंगे। गुरमीत सिंह वर्तमान में करणपुर से कांग्रेस विधायक भी थे, उन्होंने 2018 में निर्दलीय चुनाव जीता था और मंत्री बने थे।