विधानसभा चुनावों में भाजपा ने राजपूत वर्ग को साधने के लिए मेवाड़ और मारवाड़ के बड़े नामों को पार्टी में शामिल कर लिया लेकिन पश्चिम में जाट नेताओं को लेकर अब भी पार्टी में बड़ा वैक्यूम है। इसकी भरपाई कांग्रेस से हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम राजस्थान में कांग्रेस के कई जाट नेताओं से भाजपा ने संपर्क साधा है। एक नेता की शीर्ष स्तर पर मुलाकात भी हुई है। उनकी बेटी के लिए भाजपा अपने दरवाजे खोल सकती है। इधर कांग्रेस के कई जाट नेता इस बार चुनावों में उस तरह सक्रीय नजर नहीं आ रहे जितना उन्हें होना चाहिए । पार्टी में टिकटों की जद्दोजेहद के बीच इन नेताओं की गैरमौजूदगी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही है। पश्चिमी राजस्थान के एक नेता अपने पिता का ईलाज करवाने के बहाने से पिछले दिनों दिल्ली में जाकर भाजपा नेताओं से मुलाकात भी कर चुके हैं।
हनुमान की सक्रीयता से नाराज कांग्रेस के नेता
दरअसल कांग्रेस के जाट नेता पश्चिम में हनुमान बेनीवाल की सक्रीयता से नाराज हैं। यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि सीएम अशोक गहलोत बेनीवाल को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे उन्हें नुकसान होगा। जाट हार्टलैंड कहे जाने वाले नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा इसी मुद्दे को लेकर पहले ही कांग्रेस से छोड़ चुकी है। यह आरोप भी लगाए गए कि इस सरकार में कांग्रेस विधायकों से ज्यादा काम बेनीवाल के हुए हैं। वहीं सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर की ओसियां सीट से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा और हनुमान बेनीवाल की अदावत खुलकर सबके सामने है। दिव्या मदेरणा तो कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से हनुमान बेनीवाल पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। एक सार्वजनिक सभा में उन्होंने कहा था कि हनुमान बेनीवाल ने सीएम के पैर पकड़ कर अपने विधायकों को जेल जाने से बचाया था।