राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट यूजी के सफल छात्र को राहत दी। पिता के उपनाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर के कारण काउंसलिंग रोकने पर अदालत ने छात्र को प्रक्रिया में शामिल करने और अन्य वैध दस्तावेजों से सत्यापन कर प्रवेश आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने नीट यूजी के एक सफल अभ्यर्थी को राहत देते हुए संबंधित अधिकारियों को उसकी काउंसलिंग प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पिता के उपनाम में लिपिकीय अंतर या मामूली स्पेलिंग की गलती के आधार पर किसी योग्य विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और नीट काउंसलिंग समिति को निर्देश दिया कि छात्र को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया से बाहर न किया जाए।
दस्तावेजों में उपनाम का अंतर बना बाधा
हाईकोर्ट ने अपनाया व्यावहारिक रुख
ऐसी स्थिति में केवल पिता के नाम या उपनाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण छात्र को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि इस तरह की लिपिकीय गलती को हलफनामा लेकर आसानी से सुधारा जा सकता है।
काउंसलिंग समिति को प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने नीट काउंसलिंग कराने वाले सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि छात्र को मौजूदा सत्र की काउंसलिंग प्रक्रिया में बिना किसी बाधा के शामिल होने दिया जाए। साथ ही, अन्य वैध सरकारी दस्तावेजों के जरिए उसकी पहचान का सत्यापन कर प्रवेश की आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके दस्तावेजों में मामूली लिपिकीय या स्पेलिंग की त्रुटियों के कारण प्रवेश प्रक्रिया में परेशानी आती है।