राजस्थान में मानसून की गतिविधियां अब धीरे-धीरे कमजोर होने लगी हैं। शनिवार को भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, करौली और कोटा में करीब एक इंच तक बारिश दर्ज हुई, जबकि टोंक, बूंदी, अलवर और चित्तौड़गढ़ में भी हल्की बारिश हुई। पश्चिमी राजस्थान में बारिश थमने के साथ गर्मी और उमस बढ़ने लगी है।
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार से बारिश की गतिविधियों में और कमी आने की संभावना है। 17 और 18 अगस्त को प्रदेश में मौसम मुख्यतः साफ रहने, जबकि 19 अगस्त से पूर्वी राजस्थान में फिर बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। इससे पहले 16 अगस्त को प्रदेश के 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
बारिश कमजोर हुई तो बांधों पर भी असर
मानसून की बारिश से प्रदेश के बांधों की स्थिति में पिछले दो सप्ताह में सुधार हुआ है। जल संसाधन विभाग की 14 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 693 बांधों में 7,032.74 एमसीएम पानी है, जो कुल क्षमता का 53.98 प्रतिशत है। 31 जुलाई को बांधों में 6,237.46 एमसीएम यानी 47.87 प्रतिशत पानी था। इस तरह करीब दो सप्ताह में 795 एमसीएम पानी बढ़ा है। बांधों की संख्या के लिहाज से भी स्थिति सुधरी है। 14 अगस्त तक 33 बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 210 बांध अभी खाली हैं और 450 बांध आंशिक रूप से भरे हैं।
कोटा जोन सबसे आगे, पश्चिमी राजस्थान पीछे
जलभराव के मामले में कोटा जोन 67.48 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। बांसवाड़ा जोन में 55.39 प्रतिशत और जयपुर जोन में 53.48 प्रतिशत पानी है। उदयपुर में 43.29 प्रतिशत, भरतपुर में 36.86 प्रतिशत और जोधपुर जोन में सिर्फ 18.45 प्रतिशत जलभराव है। प्रमुख बांधों में बीसलपुर 72.02 प्रतिशत, राणा प्रताप सागर 70.53 प्रतिशत, जवाहर सागर 74.12 प्रतिशत, माही बजाज सागर 55.39 प्रतिशत और पार्वती बांध 54.39 प्रतिशत भरा है। जयपुर का कनोटा बांध और दौसा का मोरेल बांध 100 प्रतिशत भर चुके हैं।
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पिछले साल से अब भी 23 प्रतिशत पीछे
बारिश से राहत मिली है, लेकिन पिछले साल की तुलना में बांधों की स्थिति अभी भी कमजोर है। 14 अगस्त 2025 को 693 बांधों में 10,041.34 एमसीएम यानी 77.07 प्रतिशत पानी था, जबकि इस साल यह 7,032.74 एमसीएम यानी 53.98 प्रतिशत है। यानी पिछले साल की तुलना में करीब 3,009 एमसीएम पानी कम है। ऐसे में अब 17-18 अगस्त को बारिश में कमी के बाद 19 अगस्त से पूर्वी राजस्थान में संभावित बारिश बांधों के लिए महत्वपूर्ण होगी। अगर बारिश का नया दौर सक्रिय होता है तो जलभराव में और सुधार की उम्मीद रहेगी, जबकि पश्चिमी राजस्थान के बांधों में पानी की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।