राजस्थान में मानसून की मेहरबानी हुई है। कई जिलों में लगातार बारिश का सिलसिला बना हुआ है, लेकिन राज्य के बांधों में इस वर्ष अभी तक बीते साल की तुलना में जलभराव की स्थिति काफी कमजोर है। राज्य के कुल 693 बांधों की कुल जलभराव क्षमता 13,029.09 मिलियन घन मीटर है, जिसके मुकाबले वर्तमान में 6,490.48 मिलियन घन मीटर पानी ही उपलब्ध है। यह कुल क्षमता का 49.82 प्रतिशत है। पिछले साल इसी अवधि में बांधों में 10,033.97 मिलियन घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो 77.01 प्रतिशत जलभराव को दर्शाता था। इस तरह इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले पानी का स्तर लगभग 27 प्रतिशत कम है।
कोटा संभाग में जलभराव की स्थिति सबसे बेहतर
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटा संभाग में जलभराव की स्थिति सबसे बेहतर है। कोटा जोन के बांधों में सर्वाधिक 62.74 प्रतिशत पानी मौजूद है। इसके विपरीत, जोधपुर जोन के बांधों में सबसे कम 18.49 प्रतिशत पानी ही बचा है। अन्य संभागों में बांसवाड़ा जोन 51.06 प्रतिशत जलभराव के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि जयपुर जोन में 48.88 प्रतिशत, उदयपुर जोन में 38.35 प्रतिशत और भरतपुर जोन में 35.71 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है। प्रदेश के कुल 693 बांधों की वर्तमान स्थिति देखें तो 223 बांध पूरी तरह खाली पड़े हैं, 454 बांध आंशिक रूप से भरे हैं और केवल 16 बांध ही पूरी तरह भर पाए हैं।
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प्रमुख बांधों का जलस्तर
10 अगस्त तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के प्रमुख बड़े बांधों में जलस्तर की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। कोटा बैराज में सबसे ज्यादा 96.43 प्रतिशत जलभराव दर्ज हुआ है। इसके अतिरिक्त जवाहर सागर बांध में 70.96 प्रतिशत और राणा प्रताप सागर बांध में 67.23 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। राजधानी जयपुर समेत अन्य क्षेत्रों की जल आपूर्ति से जुड़े प्रमुख बीसलपुर बांध में इस समय 65.07 प्रतिशत जलभराव हो चुका है।