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Jaipur News: 12 करोड़ की गोल्ड ट्रेडिंग ठगी का पर्दाफाश, फर्जी फाइनेंस कंपनी की निदेशक मुंबई से गिरफ्तार

Wed, 22 Jul 2026 08:23 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12.09 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए फर्जी फाइनेंस कंपनी गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को मुंबई से गिरफ्तार किया है।
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मुंबई से फर्जी कंपनी की डायरेक्टर गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर की गई 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने फर्जी फाइनेंस कंपनी गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को मुंबई से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वर्चुअल मर्चेंट खातों के संचालन में कंपनी की अहम भूमिका थी। मामले का मुख्य आरोपी जयंता रॉय सहित अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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व्हाट्सएप के जरिए दिया गया गोल्ड ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच
एडीजी साइबर क्राइम संजय अग्रवाल ने बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर में 9 दिसंबर 2025 को दर्ज शिकायत में एक पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उसे व्हाट्सएप के जरिए ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। साइबर ठगों ने उसे एक फर्जी वेबसाइट पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में उसका भरोसा जीतने के लिए वर्चुअल वॉलेट में काल्पनिक मुनाफा दिखाया गया और बाद में लगातार अधिक निवेश करने के लिए उकसाया गया। इस तरह विभिन्न बैंक खातों और वर्चुअल मर्चेंट खातों में 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये से अधिक की राशि जमा कराकर ठगी को अंजाम दिया गया।

रकम निकालने के नाम पर भी वसूले गए करोड़ों रुपये
जब पीड़ित ने अपनी निवेश की गई राशि निकालने का प्रयास किया तो साइबर ठगों ने आयकर, प्रोसेसिंग फीस, अकाउंट अनफ्रीज शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर उससे बार-बार अतिरिक्त रकम जमा कराई। करोड़ों रुपये लेने के बावजूद न तो पीड़ित की मूल राशि लौटाई गई और न ही उसे पैसा निकालने की अनुमति दी गई।
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जांच में सामने आई कंपनी की भूमिका
साइबर थाना जयपुर की टीम ने मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच की। जांच में पता चला कि साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए वर्चुअल मर्चेंट खाते प्राइम इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को उपलब्ध कराए गए थे, जिनका संचालन गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा था। पुलिस जांच में ऑनबोर्डिंग, केवाईसी, ड्यू डिलिजेंस, रिस्क मॉनिटरिंग और फ्रॉड डिटेक्शन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। इसके अलावा इन खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर देश के कई राज्यों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होने की पुष्टि हुई।

मुंबई से गिरफ्तार हुई कंपनी की निदेशक
इस मामले में पहले आरोपी इकबाल अहमद के खिलाफ जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। आगे की जांच में कंपनी के निदेशकों की भूमिका सामने आने पर साइबर थाना जयपुर की टीम ने मुंबई में दबिश देकर कंपनी की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। इस दौरान मनी ट्रेल, फरार आरोपियों, डिजिटल साक्ष्यों और पूरे साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

फरार आरोपियों की तलाश, नेटवर्क की जांच जारी
राजस्थान पुलिस अब इस साइबर गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान में जुटी है। साथ ही राजस्थान सहित अन्य राज्यों में इस गिरोह के शिकार हुए लोगों का भी पता लगाया जा रहा है।

विशेष अभियान के तहत हुई कार्रवाई
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व थाना प्रभारी गजेन्द्र शर्मा ने किया। वहीं अनुसंधान अधिकारी पुलिस निरीक्षक अमृता सिंह, उप निरीक्षक मुकेश कुमार और कॉन्स्टेबल बोदूराम की इस कार्रवाई में विशेष भूमिका रही।
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