राजस्थान में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं, जहां अब ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। परिचितों की आवाज और वीडियो की नकल कर भावनात्मक दबाव में पैसे ट्रांसफर करवाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
साइबर ठगी के पैटर्न में भी बदलाव देखा जा रहा है। ठग “तुरंत पैसे भेजो” जैसे संदेश देकर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं, ओटीपी या बैंक डिटेल्स मांगते हैं और पीड़ित को किसी से पुष्टि करने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और तकनीकी हेरफेर का खतरनाक मिश्रण है।
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो या मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित पैसे मांगता है, तो उसके पुराने नंबर पर कॉल कर पुष्टि जरूर करें। साथ ही, ओटीपी, पासवर्ड और बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता, तकनीकी सशक्तिकरण और त्वरित कानूनी कार्रवाई तीनों ही जरूरी हैं। फिलहाल, आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि अगर सतर्कता नहीं बरती गई, तो AI और डीपफेक आधारित ठगी आने वाले समय में और बड़ा खतरा बन सकती है।