जयपुर। राजस्थान में खाद की टैगिंग को लेकर सरकार के दावों और किसानों की शिकायतों में विरोधाभास सामने आ रहा है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि किसानों को नैनो यूरिया या नैनो डीएपी खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और टैगिंग रोकने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, किसान संगठनों का आरोप है कि डीएपी के साथ नैनो खाद की किट लेने का दबाव अब भी बना हुआ है। किसान नेता रामपाल जाट का दावा है कि लाइसेंसी विक्रेताओं को इफको से ही डीएपी के साथ नैनो किट दी जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकार टैगिंग रोकने का दावा कर रही है, तो किसानों की शिकायतें क्यों बनी हुई हैं? इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खाद की उपलब्धता को लेकर उठाए सवालों के जवाब में कृषि मंत्री ने प्रदेश में खाद के स्टॉक और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए हैं।
11,770 दुकानों का निरीक्षण, 128 फर्मों पर कार्रवाई
खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर कार्रवाई का ब्योरा देते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि अब तक 11,770 उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण किया गया और 9,585 नमूने लिए गए। अनियमितताएं मिलने पर 1,238 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 64 विक्रेताओं की बिक्री पर रोक लगाई गई, जबकि 128 फर्मों के प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त किए गए।
मंत्री ने कहा कि खाद की बिक्री में टैगिंग और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए कृषि विभाग के कार्मिकों की मौजूदगी में वितरण कराया जा रहा है। सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष बनाकर निगरानी भी की जा रही है।
नैनो खाद जबरन नहीं बेच सकते
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इनकी खरीद किसानों की इच्छा पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार के भंडारण से किसानों को क्या लेना है। कृषि मंत्री ये दावा करें कि जिस किसान को यूरिया चाहिए उसे मिल रहा है तो बात समझ आए। अगर यूरिया मिल रहा है तो तो किसान का क्या दिमाग खराब है कि वो सारा काम छोड़कर यूरिया के लिए लाइन में लगा पड़ा है।
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टैगिंग नहीं के दावे हुए फेल
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा भले यह दावा कर रहे हैं कि किसानों को नैनो यूरिया खरीदने के लिए बाद्य नहीं किया जा सकता। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि बिना नैनो यूरिया के उन्हें डीएपी मिल ही नहीं रही।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि किसानों को खाद बांटने वाले लाइसेंसी को इफको से ही डीएपी के साथ नैनो यूरिया टैग करके दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद बांटने वाले कहते हैं कि हम इस नैनो किट को अपने साथ कहां लेकर जाएं क्योंकि इफको ने तो उनसे इसके भी पैसे लिए हैं।
रामपाल जाट ने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा 2 साल से यह दावे कर रहे हैं कि नैनो किट की टैगिंग नहीं होगी। इसके लिए राजस्थान की तरफ से भारत सरकार को पत्र भी लिखे गए हैं। इसके बावजूद नेनौ किट की टैगिंग की जा रही है।