राइजिंग राजस्थान के रोड शो को लेकर आज दक्षिण कोरिया पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा ने राजस्थान की अर्थव्यवस्था को अगले पांच सालों में 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का दावा किया है। इसके लिए वे निवेश लाने की भरपूर कोशिश भी कर रहे हैं। लगातार रोड शो कर रहे हैं, लेकिन वित्तीय प्रबंधन को लेकर उन्हें कोई ठोस कदम उठाने होंगे।
ग्रांट का पैसा कैपिटल में दिखाया- ये मूल नियमों के विरुद्ध
2022-23 में वित्त विभाग ने राजस्थान की सार्वजनिक कंपनियों व ऑटोनोमस बॉडीज के खाते में ग्रांट के रूप 493 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस राशि को गलत तरीके से कैपिटल एक्सपेंडीचर हैड में दिखाया।
राजस्थान को कर्ज में डुबोते अफसरों को RBI ने बार-बार चेताया
2022-23 वित्तीय वर्ष में 124 दिन सरकार को आरबीआई में कैश बैलेंस मेटेंन करने के लिए स्पेशल वेज एंड मीन्स एडवांस लेना पड़ा। यह राशि 1, 01, 386 करोड़ रुपये थी। इसके एवज में आरबीआई को 112 करोड़ रुपये का ब्याज सरकारी खजाने से चुकाना पड़ा। दिसंबर 2023 में RBI ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए पत्र लिखा कि हर तिमाही में राजस्थान अपनी सीमा से बाहर जाकर कर्ज ले रहा है।
ट्रेजरी बिलों की राशि ठिकाने लगाई
राज्य के खजाने में अधिशेष 5 हजार करोड़ रुपये व ट्रेजरी बिल्स के रूप में 15 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च कर दी।
संस्थानों की जमा राशि भी खर्च कर डाली
राजस्थान की विभिन्न यूनिवर्सिटीज व सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों की जो राशि बैंकों में भविष्य की जरूरतों के लिए जमा थी, उसे वित्त विभाग के अफसरों ने पीडी खातों में ट्रांसफर करवाकर खर्च कर दी। इससे यह हुआ कि ये संस्थान अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए पूरी तरह राज्य सरकार पर ही निर्भर हो गए।
DMFT का खाता भी उड़ाया
DMFT फंड में जमा 5 हजार करोड़ रुपये भी नियमों के बाहर जाकर खर्च कर दिए।
संचित निधि को दांव पर लगाया
राज्य की बिगड़ी अर्थव्यवस्था के कारण वित्तीय संस्थाओं ने जब सरकारी प्रतिभूति पर ऋण देने से मना कर दिया तो DIRECT DEBIT MANDATE की शर्त पर मौजूदा सरकार से साइन करवा कर कर्ज उठा लिया। इस शर्त के मायने ये हैं कि कर्ज देने वाली संस्थाएं राज्य की संचित निधि से बिना सरकार की अनुमति के सीधे पैसा वसूल सकेंगी। केंद्र सरकार द्वारा तय सीमा से ज्यादा कर्ज होने पर इन्होंने लगभग समस्त बोर्ड, कंपनियों को विभिन्न बैंकों, HUDCO, LIC, REC से जबरन कर्ज दिलवा दिया। कई बोर्ड-कॉरपोरेशन के फिक्स डिपॉजिट तक तुड़वा डाले। आज स्थिति ये है कि बोर्ड-कॉरपोरेशन और पीएसयूज पर 1 लाख 10 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है।
चेताने के बाद भी सेंट्रलाइज्ड भुगतान व्यवस्था लागू की गई
CAG के बार-बार चेताए जाने के बावजूद IFMS में बिलों के ऑटोमेशन व ट्रेजरी अकाउंटिंग सिस्टम को बाईपास कर सेंट्रलाइज्ड भुगतान व्यवस्था लागू की गई। इसके चलते सरकार का चेकिंग सिस्टम ठप हो गया। आज स्थिति ये है कि पेंशनर्स महीनों से पेंशन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। दूसरी तरफ कर्मचारी के रिटायर हुए बिना ही उसके खातों में पेंशन बेनिफिट ट्रांसफर हो रहे हैं। कई ऑफिसों में 7 गुना सेलेरी क्रेडिट हो रही है तो कई ऑफिस में वेतन बिल जनरेट होने के बाद भी खातों में वेतन ट्रांसफर नहीं हो रहे। ऐसे हजारों केस लगातार सरकार के सामने आ रहे हैं, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि सरकार के राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।
NPS घोटाला: कर्मचारियों के खातों से कटौती की, लेकिन जमा नहीं करवाया
यही नहीं वित्त विभाग के अफसरों ने पिछली सरकार को खुश करने के लिए कर्मचारियों के पैसे मुफ्त वाली योजनाओं पर लुटा दिए। इसमें ओपीएस लागू हेाने से पहले जनवरी से मार्च 2022 तक कर्मचारियों खातों से कटौती की गई। अंशदान की रकम केंद्र सरकार के एनएसडीएल फंड में जमा ही नहीं करवाई गई। इसका खुलासा सीजीए ने अपनी रिपोर्ट में किया था।
जीपीएफ घोटाला: कर्मचारियों के कल्याण में लगनी थी, रेवेन्यू घाटा कम करने में लगा दी
जीपीएफ सेटलमेंट फंड में जमा तीन हजार करोड़ रुपये की जो राशि कर्मचारी कल्याण कोष में जमा करवानी थी। उसे रेवेन्यू घाटे को कम करने में लगा दिया। सीएजी की ओर से राज्य सरकार को ऐसा करने से मना भी किया गया, लेकिन अफसर हर साल नया झूठ गढ़ कर पैसा ठिकाने लगा गए।
RWSSC घोटाला: बिना विधानसभा से पूछे पीडी खातों में राशि ट्रांसफर
वित्त (मार्गोपाय) विभाग ने पेयजल परियोजना आरडब्ल्यूएसएससी में पेयजल के यूजर चार्जेज की राशि बिना विधानसभा से अनुमति सीधे पीडी खातों में ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। ये न सिर्फ विधायिका का विशेषाधिकार हनन के दायरे में आता है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ भी है। सीएजी ने एक बार इस आपत्ति जातते हुए वित्त (मार्गोपाय) विभाग से स्पष्टिकरण देने को कहा है। इस संबंध सीजीए पहले भी राज्य सरकार को तीन चिट्ठी भी लिखी, लेकिन वित्त (मार्गोपाय) विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा।
पंचायतों का पैसा रिलीज नहीं किया
वित्त विभाग के अफसरों ने पंचायतों का पैसा रिलीज नहीं किया। नतीजा इस सरकार में पंचायतों में हड़ताल हो गई। ताले लग गए। सोशल सिक्यूरिटी पेंशन का पैसा महीनों तक पेंडिंग रखा जा रहा है। अभी जून से पैसा रिलीज नहीं हुआ है। बेरोजगारी भत्ते को लेकर भी खूब बवाल हुआ। विपक्ष ने इसे विधानसभा में मुद्दा बना डाला। दबाव पड़ा तब जाकर भुगतान हुआ। केंद्रीय योजनाओं के लिए स्टेट शेयर रिलीज नहीं किया। नतीजा केंद्र सरकार ने आगे की किश्तें रोक दी। राजस्थान में योजनाएं ठप पड़ गईं।