पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने गंगनगर कैनाल में पानी की समस्या का मुद्दा उठाया तो सीएम गहलोत ने मैडम को पूरी तवज्जो देते हुए तुरंत पंजाब के सीएम को फोन लगाकर समस्या समाधान का आश्वासन दे दिया। इश्यू बढ़ने से पहले ही सीएम गहलोत ने अपने सियासी अंदाज़ में जवाब दे दिया। खास बात यह है कि बीजेपी के अन्य नेताओं ने यह मुद्दा नहीं उठाया, न कोई आंदोलन किया। लेकिन सीएम गहलोत ने पूर्व सीएम की पोस्ट को देखते हुए और नहरी क्षेत्र के किसानों की समस्या के समाधान को देखते हुए पंजाब सीएम से फोन पर बातचीत कर समस्या का समाधान करने और पानी छोड़ने का आश्वासन ले लिया।
हालांकि नहरी क्षेत्र के कलेक्टर, एसपी, संभागीय आयुक्त पर सवाल उठ रहे हैं कि समय रहते उन्होंने सीएम को ग्राउंड रियलिटी क्यों नहीं बताई। चुनावी साल में किसानों को सरकार नाराज़ नहीं करना चाहती है। अबकी बार मॉनसून की शुरुआत शानदार रही, लेकिन मॉनसून पीरियड के मिड टर्म में बरसात रुक गई, जिससे किसानों की खड़ी फसल को नुकसान हो रहा है। सिंचाई के पानी का बड़ा संकट आ गया है। उम्मीद है जल्द ही पंजाब राजस्थान के हिस्से का पानी छोड़ेगा और नहरी क्षेत्र सरसब्ज होगा। मॉनसून से भी उम्मीद है कि आगामी दिनों में प्रदेश को निराश नहीं करेगा। 19 अगस्त से मॉनसूनी बारिश की संभावना भी मौसम विभाग ने जताई है।
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखी
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने आज ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखी थी। जिसमें कहा, गंगनहर के माध्यम से गंगानगर, करणपुर, सादुलशहर और रायसिंहनगर को सिंचाई का पानी उपलब्ध होता है। फ़िरोज़पुर फीडर से तय शेयर के अनुसार राजस्थान के हिस्से में 52% यानी 2,800 क्यूसेक सिंचाई का पानी मिलता है। लेकिन अफ़सोस किसान विरोधी राजस्थान और पंजाब सरकार के बीच मतभेद होने के कारण यहां पानी की आवक बिल्कुल ख़त्म हो गई है। बात इतनी ही नहीं है पिछले महीने ही खखां हैड से पंजाब सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बीकानेर कैनाल में 200 क्यूसेक पानी और कम कर दिया है। इससे पानी की मात्रा कम होकर महज़ 1350 क्यूसेक ही रह गई है, जिसका सीधा नुक़सान हमारे अन्नदाता किसान को उठाना पड़ रहा है।
यह सर्व विदित है कि फ़सलों के पकाव के समय पानी की ज्यादा ज़रूरत होती है। ऐसे वक्त में गंगनहर में पानी की आवक रोक देना हमारे किसान भाईयों के साथ घोर अन्याय है। गंग नहर परियोजना विकास के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 20.52 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की है, लेकिन राजस्थान सरकार किसानों को सिंचाई के लिए जलापूर्ति करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कांग्रेस सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर किसान हितों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।