राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्य सरकार के चार वरिष्ठ मंत्रियों- किरोड़ीलाल मीणा, गजेंद्रसिंह खींवसर, मदन दिलावर और कन्हैयालाल चौधरी को दिल्ली बुलाए जाने के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल और संगठनात्मक बदलावों की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि भाजपा और राज्य सरकार की ओर से इन बैठकों को नियमित प्रशासनिक एवं संगठनात्मक चर्चा बताया जा रहा है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इन चार मंत्रियों में से मदन दिलावर की मुलाकात शाह से अभी नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पिछले कुछ समय में कई बार दिल्ली का दौरा कर चुके हैं। पिछले दिनों वे दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात में वे अपने साथ कुछ दस्तावेज भी लेकर गए थे और अब बीते दो दिनों से दिल्ली में ही मौजूद हैं। यहां वे लगातार केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अमित शाह से भी मुलाकात की है।
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सबसे पहले किरोड़ीलाल मीणा को बुलाया गया
सूत्रों के अनुसार बसे पहले कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को दिल्ली तलब किया गया। अमित शाह के साथ हुई बैठक में उन्होंने सरकार के साथ अपने कुछ मतभेदों और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने को लेकर असंतोष जताया। बैठक में उनके विभाग के कामकाज और फीडबैक पर भी चर्चा हुई।
किरोड़ीलाल मीणा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बैठक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि अमित शाह के साथ राजस्थान के विकास, सुशासन और जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसके बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी भी दिल्ली पहुंचे। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भी दिल्ली तलब किया गया था लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। जानकार सूत्रों के अनुसार दिलावर को फिर दिल्ली बुलाया जाएगा।
क्या यह सरकार के कामकाज का फीडबैक है ?
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन और संगठन से मिल रहे फीडबैक की समीक्षा कर रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है और किसी संभावित फेरबदल पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी राजनीतिक नियुक्तियों के संकेत दिए हैं। बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियों में हो रही देरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस सरकार की तरह सत्ता में आते ही पूर्ववर्ती नियुक्तियों को समाप्त नहीं किया। कई पदाधिकारियों, जिनमें अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) भी शामिल हैं, को उनका कार्यकाल पूरा करने दिया गया। इसी कारण नई नियुक्तियों में अपेक्षा से अधिक समय लगा।
बीजेपी अध्यक्ष बोले- राय मांगी जाती है तो संगठन सुझाव देता है
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल पर मदन राठौड़ ने कहा कि यह पूरी तरह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने स्वीकार किया कि मंत्रिमंडल में कुछ पद रिक्त हैं लेकिन विस्तार कब होगा, इसका निर्णय मुख्यमंत्री ही करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी से राय मांगी जाती है तो संगठन केवल नामों का सुझाव देता है। इसी तरह यदि संगठन को किसी मंत्री की आवश्यकता पार्टी कार्य में होती है तो वह सरकार से अनुरोध कर सकता है।
बदलाव की अटकलें क्यों तेज हैं?
राजस्थान की भजनलाल सरकार के मौजूदा मंत्रिमंडल में सीएम सहित 24 मंत्री हैं। इनमें सीएम, 2 डिप्टी सीएम,12 कैबिनेट मंत्री, 4 स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, 5 राज्यमंत्री शामिल हैं। प्रदेश में सीएम सहित कुल 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं, यानी अभी 6 मंत्रियों के लिए जगह खाली है। मौजूदा सरकार गठन के बाद से अपना आधा कार्यकाल पूर्ण कर चुकी है। बचे हुए ढाई साल में सरकार को अपने मंत्रिमंडल में खाली पदों को भरने के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों का कोटा भी पूरा करना है क्योंकि इसके बाद सरकार को पंचायत, निकाय चुनावों का सामना करना है।
पांचवें साल में सरकार और संगठन पूरी तरह चुनावी मोड में चले जाते हैं। इसलिए देखा जाए तो अपना परफॉरमेंस दिखाने के लिए सरकार के पास ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में उसे शेष पदों पर नियुक्तियों का कोटा जल्द से जल्द भरना ही है। हालांकि राजस्थान मंत्रिमंडल में फेरबदल, विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन सियासी गलियारों में अब चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।