राजस्थान में 7 सीटों पर होने जा रहे उपचुनावों में कुल 69 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन इन सातों सीटों के प्रमुख दावेदारों की बात की जाए तो इनमें से 5 सीटों पर त्रिकोणीय और 2 पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच आमने-सामने की टक्कर नजर आ रही है। जिन 5 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है, उनमें झुंझुनू, खींवसर, देवली उनियारा, चौरासी और सलूंबर की सीट शामिल है, जबकि दौसा, रामगढ़ में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने नजर आ रही है। त्योहारी सीजन होने की वजह से फिलहाल इन सीटों पर चुनावी माहौल जमा नहीं है। लेकिन प्रचार में जुटे नेताओं को उम्मीद है कि 4 नवंबर के बाद वोटरों में सभाओं में भीड़ भी जुटेगी और माहौल में भी गरमाहट आएगी।
झुंझुनू: निर्दलीय गुढ़ा दोनों खेमों में सेंधमारी में जुटे
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके राजेन्द्र सिंह गुढ़ा यहां निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। वहीं कांग्रेस ने सांसद बृजेंद्र ओला के बेटे अमित ओला तथा बीजेपी ने राजेंद्र भांबू को टिकट दिया है। गुढ़ा इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के खेमों में सेंधमारी कर सकते हैं। बीजेपी के परंपरागत राजपूत वोट से लेकर कांग्रेस के मुस्लिम और एससी वोटरों पर इनकी नजर है।
चौरासी: बीएपी, बीजेपी और कांग्रेस में टक्कर
लोकसभा में यहां बीएपी ने कांग्रेस से गठबंधन किया था। लेकिन इस बार गठबंधन नहीं होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। आदिवासी बाहुल्स इस सीट पर बीएपी ने अनिल कटारा, कांग्रेस ने महेश रोत व बीजेपी ने कारीलाल निनामा प्रत्याशी घोषित किया है। पिछले चुनाव में बीएपी के राजकुमार रोत ने बड़े अंतर से चुनाव जीता था।
सलूंबर: बीजेपी सहानुभूति की आस में
विधायक अमृत लाल मीणा के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर बीजेपी ने उनकी पत्नी शांता देवी मीणा अपना प्रत्याशी घोषित किया है। बीजेपी को उम्मीद है कि सहानुभूति की लहर का फायदा उन्हें मिलेगा। कांग्रेस ने रेशमा मीणा को अपना उम्मीद्वार बनाया है। वहीं भारत आदिवासी पार्टी के चुनावी मैदान में डटे रहने से इस सीट पर भी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। बीएपी ने पिछले विधानसभा चुनावों में भी यहां अपनी उपस्थिति जोरदार तरीके से दर्ज करवाई थी। इसलिए इस सीट पर मुकाबला कड़ा होगा।
खींवसर- यहां चुनाव हनुमान बेनीवाल की साख का
आरएलपी की गढ़ मानी जाने वाली खींवसर विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने यहां इस बार अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को टिकट दिया है। कांग्रेस से रतन चौधरी चुनाव मैदान में है, वहीं भाजपा रेवंतराम डांगा चुनाव में उतर गए हैं। डांगा का गत विधानसभा चुनाव में बेनीवाल से सीधा मुकाबला था, जिसमें वे केवल 2049 वोटों से ही हारे थे। लेकिन यह चुनाव इस बार हनुमान बेनीवाल की साख से जुड़ गया है। इसलिए यहां मुकाबला रोचक होगा।
देवली-उनियारा: नरेश को आरएलपी, बीएपी का समर्थन
इस सीट पर कांग्रेस बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नरेश मीणा ने नामांकन वापस नहीं लेकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस से केसी मीणा व बीजेपी से राजेंद्र गुर्जर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।
रामगढ़, दौसा में आमने-सामने की टक्कर
रामगढ़ और दौसा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आमने-सामने की टक्कर है। रामगढ़ विधानसभा सीट पर नाराज नेताओं को मनाकर भाजपा सीधे मुकाबले के लिए तैयार है। इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान तो भाजपा के सुखवंत सिंह के बीच आमने-सामने का मुकाबला है। वहीं, दौसा सीट पर मजबूत बागी उम्मीदवार मैदान में नहीं होने से मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच दिखाई दे रहा है। बीजेपी की ओर से किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा और कांग्रेस प्रत्याशी डीडी मीणा के बीच मुकाबला है।