राजस्थान विधानसभा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर हुई चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बूंदी से कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजनाओं का उल्लेख किया और मौजूदा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री पर तंज कसा।
शर्मा ने कहा कि यह विडंबना है कि जिनके पास विभाग का प्रभार है, उनका उपनाम भी गहलोत है। एक गहलोत ने गरीबों के हित में सोचते हुए सामाजिक सुरक्षा को अधिकार बनाया, जबकि दूसरे गहलोत चार महीने तक पेंशन का भुगतान नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में न्यूनतम गारंटी आय कानून के तहत पेंशन को अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया गया था और नियमों के अनुसार हर वर्ष 15 प्रतिशत वृद्धि होनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने तय समय पर बढ़ोतरी नहीं की।
उन्होंने दावा किया कि विभाग ने 91 हजार लाभार्थियों को चार महीने तक पेंशन नहीं दी, जो गरीब, वृद्ध और दिव्यांगों के साथ अन्याय है। शर्मा ने मांग की कि नियमानुसार 1400 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जानी चाहिए।
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इस पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने पहले ही वर्ष में पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1150 रुपये और फिर 1250 रुपये की। अब 50 रुपये और बढ़ाकर 1300 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंने चार महीने की पेंशन बकाया होने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि केवल एक माह की पेंशन प्रक्रिया में रहती है और भुगतान नियमित किया जा रहा है। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने दो वर्षों में 10.50 लाख नए लाभार्थियों को जोड़ा है।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कानून के तहत हर वर्ष 15 प्रतिशत वृद्धि अनिवार्य है लेकिन सरकार ने क्रमिक रूप से 100 और 50 रुपये की आंशिक बढ़ोतरी की है। उन्होंने सरकार से नियमों के अनुरूप पूरी वृद्धि लागू करने और स्पष्ट घोषणा करने की मांग की। बहस के दौरान सदन में कुछ देर व्यवधान भी रहा, जिसके बाद अध्यक्ष ने अन्य सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया।