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राजस्थान विस के पहले दिन हंगामा: कांग्रेस विधायकों को रोका, गेट पर धरना; अब सरकार-पुलिस के खिलाफ क्या तैयारी?

Thu, 20 Aug 2026 03:17 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान विधानसभा में प्रवेश को लेकर कांग्रेस और पुलिस के बीच विवाद बढ़ा। बैरिकेडिंग और धक्का-मुक्की के बाद कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का ऐलान किया।
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सरकार-पुलिस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान विधानसभा का सत्र में कांग्रेस विधायकों को बेरिकेडिंग लगाकर रोकने का मामला तूल पकड़ गया है। कांग्रेस ने अब इस मामले में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने जा रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विधायकों को विधानसभा पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाई। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मसला है। पुलिस विधायकों को विधानसभा जाने से कैसे रोक सकती है। इसे लेकर अब कांग्रेस स्पीकर के पास सरकार और पुलिस दोनों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने कहा कि अब यह स्पीकर पर निर्भर करता है वे इनमें से किसके खिलाफ प्रस्ताव को स्वीकर करते हैं।

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गौरतलब है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन गुरुवार को स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर रोक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधानसभा पहुंचने से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च किया। विधानसभा के बाहर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर कांग्रेस विधायकों को रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और कुछ विधायक बैरिकेड्स पर चढ़ गए।

विधानसभा गेट के बाहर कांग्रेस विधायकों ने धरना दिया। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस नेता सचिन पायलट समेत कई विधायक शामिल हुए। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और सरकार पर स्कूलों की बदहाली छिपाने के लिए मीडिया की एंट्री रोकने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता विधानसभा के पश्चिमी द्वार से पैदल विधानसभा में जाना चाहते थे लेकिन मार्शल प्रतिनिधियों ने दरवाजे को ताला लगाकर बंद कर दिया।  इसके बाद कांग्रेस विधायक विधानसभा गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

जूली बोले- ‘बीजेपी अपने पाप ढकने के लिए ढक्कन कानून लाई’

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धरने के दौरान टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदन चलाना चाहती है, लेकिन जब विधानसभा में प्रवेश के लिए वर्षों से इस्तेमाल होने वाला गेट आज बंद कर दिया गया तो यह सवाल उठता है कि विपक्ष को क्यों रोका गया।

जूली ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में विशेषाधिकार हनन का नोटिस देगी। उन्होंने स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि प्रदेश में 3768 स्कूल जर्जर घोषित किए गए, लेकिन एक भी स्कूल का काम पूरा नहीं हुआ। उन्होंने 85 हजार स्कूलों के कमरों के जर्जर होने, करीब सवा लाख शिक्षकों के पद खाली होने और पिछले तीन वर्षों में करीब 9 लाख बच्चों के स्कूल छोड़ने का भी दावा किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के बयानों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार को स्कूलों की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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सदन में कांग्रेस की गैरमौजूदगी में चली कार्यवाही
कांग्रेस के धरने के बीच विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही सुबह 11:22 बजे शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह पहले दिन विधानसभा की कार्यवाही महज 21 मिनट चली। कार्यवाही स्थगित होने के साथ ही कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा गेट के बाहर अपना धरना भी समाप्त कर दिया।

दो विधेयक सदन में पेश
पहले दिन कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी के बीच सत्ता पक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही जारी रखी। सरकार की ओर से गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक और राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक सदन में पेश किए गए। इन पर बहस के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

BAP का भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन
वहीं, मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग को लेकर भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायकों ने भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। इस तरह मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा के बाहर कांग्रेस और BAP के अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन देखने को मिला।

BAC में शुक्रवार तक का कामकाज तय
विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में फिलहाल शुक्रवार तक का कामकाज तय किया गया है। शुक्रवार को प्रश्नकाल और शून्यकाल होगा। इसके अलावा यूसीसी विधेयक सदन में रखा जाएगा। फिलहाल शुक्रवार को किसी विधेयक को पारित करने का कार्यक्रम नहीं है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को सदन की कार्यवाही पूरी होने के बाद अगली कार्यवाही नवंबर तक के लिए स्थगित की जाएगी। नवंबर को पंचायत चुनावों के परिणाम जारी होने के बाद सदन फिर से जुटेगा।

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