सार
विधानसभा में कांग्रेस विधायक डूंगरराम गैदर ने पंजाब की फैक्ट्रियों से आ रहे दूषित पानी का मुद्दा उठाया। सरकार ने कहा- पंजाब से संपर्क में हैं, केंद्र को भी अवगत कराया गया है। जल की जांच और रोकथाम के प्रयास जारी हैं।
राजस्थान विधानसभा में आज बुधवार को पंजाब की फैक्ट्रियों से आने वाले गंदे पानी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक विधायक डूंगर राम गैदर ने प्रश्नकाल में सरकार से सवाल पूछा था कि जालंधर की फैक्ट्रियों से नहरों में आ रहे गंदे पानी को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है। सवाल चार खंड में पूछा गया था इनमें से 3 खंड स्पीकर ने अग्राह्य कर दिए। इस पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई। सरकारी मुख्य सचेतक ने कांग्रेस विधायकों को टोकते हुए कहा कि स्पीकर के फैसले पर सवाल नहीं उठा सकते। इस पर कांग्रेस विधायकों ने यह कहते हुए हंगामा कर दिया कि मुख्य सचेतक को इस मामले में टोका-टोकी का कोई अधिकार नहीं है। सरकार की तरफ से जवाब देते हुए जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और राजस्थान सरकार के अधिकारियों की एक कमेटी बनी हुई है। पंजाब सरकार अपने यहां 57 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स बना चुकी है और 10 पर अभी काम चल रहा है। इनके बनने के बाद वहां की फैक्ट्रीज से आने वाला गंदा पानी रुक जाएगा।
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डूंगरराम गैदर ने कहा कि पंजाब के जालंधर की फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित पानी नहरों के ज़रिए श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों तक पहुंच रहा है, जिससे खेतों की उपज और लोगों की सेहत दोनों प्रभावित हो रही है। गैदर ने सरकार से पूछा कि इस प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ एक पर्यावरणीय संकट है, बल्कि किसानों और ग्रामीणों के जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। जलदाय मंत्री ने कहा कि कि राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार से इस विषय पर कई बार संपर्क किया है और मामले को गंभीरता से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल आयोग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस संबंध में अवगत कराया गया है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूछा कि आखिरी बार सरकार पंजाब सरकार से कब संपर्क किया था और वहां से आ रहे गंदे पानी की जांच कब हुई। इस पर जलदाय मंत्री ने कहा कि वहां से आने वाले पानी की हर घंटे क्वालिटी जांच कर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाती है।