जोबनेर उपखंड के सरकारी स्कूल बदहाल स्थिति में हैं। ग्राम आसलपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की छत से पानी टपक रहा है, दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है और कक्षाओं में दरारें हैं।
जोबनेर उपखंड क्षेत्र में स्थित कई सरकारी विद्यालय इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर उदाहरण बनते जा रहे हैं। स्कूल भवनों की जर्जर हालत ने बच्चों की जान को जोखिम में डाल दिया है। खासकर ग्राम आसलपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। स्कूल की छत से लगातार पानी टपक रहा है, दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है और कक्षाओं में बड़ी-बड़ी दरारें देखने को मिल रही हैं। इन खतरनाक हालात में नन्हे बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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स्थानीय निवासी महेश कुमावत ने बताया कि "हमने कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन को ज्ञापन देकर हालात से अवगत कराया है, लेकिन आज तक किसी ने सुध नहीं ली। क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद ही जागेगा?" विद्यालय की कार्यवाहक संस्था प्रधान अलका गुर्जर ने भी भवन की गंभीर हालत को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि "बारिश के मौसम में बच्चों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भवन की स्थिति बेहद खराब है और विभाग को लिखित रूप से इसकी जानकारी दी जा चुकी है।"
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गौरतलब है कि हाल ही में झालावाड़ जिले में एक स्कूल भवन गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। बावजूद इसके जोबनेर जैसे इलाकों में स्थित स्कूलों की हालत में सुधार के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। गांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही विद्यालय की मरम्मत शुरू नहीं की गई, तो वे बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे।