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यूसीसी पर आगे बढ़ी सरकार: जनसुनवाई के लिए समिति गठित-जनता से राय से पहले बढ़ा सियासी पारा

Wed, 08 Jul 2026 05:23 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान सरकार ने UCC पर 10-11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई तय की है। ऑनलाइन सुझाव भी लिए जा रहे हैं। प्रक्रिया शुरू होते ही कांग्रेस-भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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यूसीसी - फोटो : एआई
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विस्तार
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राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सरकार ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। राजस्थान में समान नागरिक संहिता पर जन सुनवाई शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने एक रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में समिति का गठन कर दिया है। समिति ऑनलाइन सुझाव लेने के बाद 10-11 जुलाई को पहली संभाग स्तरीय जनसुनवाई होगी।  समिति प्रदेशभर से सुझाव जुटाकर सरकार को रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

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इसके साथ ही राज्य सरकार ने ucc.rajasthan.gov.in पोर्टल शुरू कर नागरिकों से सुझाव मांगे हैं। पोर्टल पर 19 प्रश्नों के माध्यम से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर राय ली जा रही है। लोग अपने विस्तृत सुझाव और दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं।

अब प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। 10 और 11 जुलाई को जयपुर में पहली संभाग स्तरीय जनसुनवाई होगी, जहां जनप्रतिनिधियों, विभिन्न धार्मिक संगठनों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद अन्य संभागों में भी इसी तरह की जनसुनवाई प्रस्तावित है।

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दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रक्रिया, समिति और सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक एजेंडा बताया है, जबकि भाजपा इसे व्यापक जनभागीदारी से कानून बनाने की पहल बता रही है।
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नागरिकों से इन सवालों पर ली जाएगी राय-
- क्या वे संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं?
- क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं?
- क्या यूसीसी संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू की जा सकती है?
- क्या विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल किया जाए?
- क्या सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम होने चाहिए?
- क्या तलाक का अनिवार्य पंजीकरण हो?
- क्या भरण-पोषण के लिए एक समान कानून बनाया जाए?
- क्या महिलाओं और पुरुषों को समान संपत्ति अधिकार मिले?
- क्या लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए?
- क्या लिव-इन संबंधों से जुड़ी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को कानून में शामिल किया जाए?
- क्या बहुविवाह महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करता है?
- क्या यूसीसी से सामाजिक कुरीतियों और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी?

जनसुनवाई से पहले ही UCC प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना

कांग्रेस का हमला: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने यूसीसी को लेकर सरकार की मंशा और पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब अभी तक समान नागरिक संहिता का कोई प्रारूप (ड्राफ्ट) ही तैयार नहीं हुआ है, तब जनसुनवाई कराने का औचित्य क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पानी, बिजली, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं जैसे वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है। डोटासरा ने समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संघ (RSS) की पृष्ठभूमि वाले लोगों को शामिल किया गया है और यही समिति कई राज्यों में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनभागीदारी चाहती है तो कांग्रेस भी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ जनसुनवाई में शामिल होकर अपनी बात रखेगी।

भाजपा का जवाब: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अभी केवल जनता से सुझाव ले रही है और अंतिम कानून व्यापक जनपरामर्श के बाद तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदू लॉ या मुस्लिम पर्सनल लॉ में कोई बदलाव होगा या नहीं, इसका फैसला भी सभी वर्गों की राय के आधार पर ही होगा। राठौड़ ने कहा कि जिन राज्यों में यूसीसी लागू है, वहां के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है और राजस्थान की परिस्थितियों के अनुरूप कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि यदि उसे किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वह जनसुनवाई में अपने सुझाव दे या बाद में विधानसभा में अपनी बात रखे। उनके अनुसार, कांग्रेस के पास विरोध का कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह यूसीसी पर अनावश्यक राजनीति कर रही है।

आगे क्या?
10 और 11 जुलाई की जनसुनवाई से स्पष्ट होगा कि विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की UCC पर क्या राय है। समिति इन सुझावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार UCC का प्रारूप तैयार कर उसे आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए बढ़ा सकती है।

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