राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नाटक का यह चुनाव PFI और कांग्रेस के खिलाफ है। बजरंगबली के समर्थन का चुनाव है। बजरंगबली के भक्तों को यह तय कर लेना चाहिए कि कर्नाटक में हिंदुत्व की, राष्ट्रवाद की और देश के स्वाभिमान की सरकार चलेगी।
हिंदुस्तान की अस्मिता का चुनाव
जहां पहुंचे चीलगाड़ी वहां भी पहुंचे मारवाड़ी- पूनिया
डॉ. पूनिया ने प्रवासी राजस्थानियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुरानी कहावत है, जहां पहुंचे रेलगाड़ी वहां पहुंचे मारवाड़ी। जहां पहुंचे बैलगाड़ी वहां पहुंचे मारवाड़ी। चीन के बॉर्डर और अरुणाचल प्रदेश तक मारवाड़ी पहुंच गए, जो अपने अथक परिश्रम से देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली है, उन्होंने चीलगाड़ी सस्ती कर दी। अब जहां पहुंचे चीलगाड़ी वहां भी पहुंचे मारवाड़ी, तो तीनों तरीके से मारवाड़ी पहुंच सकते हैं। राजस्थान के लगभग 2 करोड़ प्रवासी राजस्थानी दुनिया के हर हिस्से में हैं। इससे भी बड़ी खुशी की बात है कर्नाटक में लाखों की संख्या में प्रवासी राजस्थानी रहते हैं और अकेले बेंगलुरू में 20 लाख से अधिक प्रवासी राजस्थानी निवास करते हैं।
सब लोगों की निगाह राजस्थानियों पर- पूनिया
उस शख्स का अभिनंदन कीजिए, जिन्होंने PFI को बैन किया
सतीश पूनिया ने कहा कि जिस तरीके से कर्नाटक में पीएफआई जैसे संगठनों ने आंख उठाकर यहां की सुख-शांति को ग्रहण लगाने की कोशिश की, आप उस शख्स का अभिनंदन कीजिए, जिन्होंने पीएफआई को बैन किया। जिन्होंने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के झंडे को ऊंचा और बुलंद किया। इसलिए कर्नाटक का यह चुनाव केवल कर्नाटक की सरकार का चुनाव नहीं है, यह चुनाव हिंदुस्तान की अस्मिता का चुनाव है, हिंदुस्तान के स्वाभिमान का चुनाव है, हिंदुस्तान के गौरव का चुनाव है।
यह चुनाव PFI के खिलाफ और बजरंगबली के समर्थन का चुनाव है
सतीश पूनिया ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार इसलिए ही नहीं कही जाती, कर्नाटक में सुख शांति और समृद्धि आए, यह भाजपा सरकार का संकल्प है। कुछ लोग इस नीयत से काम करते हैं कि बजरंग दल को बैन करो और पीएफआई को चालू करो, यह चुनाव उन लोगों के खिलाफ यह चुनाव है। चुनाव पीएफआई के खिलाफ है और बजरंगबली के समर्थन का चुनाव है। बजरंगबली के भक्तों को यह तय कर लेना चाहिए कि कर्नाटक में हिंदुत्व की, राष्ट्रवाद की और देश के स्वाभिमान की सरकार चलेगी।