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Politics: विधानसभा में जासूसी कैमरे? नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा, जांच की मांग

Thu, 11 Sep 2025 05:29 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Politics: राजस्थान विधानसभा में गुप्त "जासूसी कैमरे" लगाने का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की। कहा– कैमरे स्पीकर कक्ष से जुड़े हैं, गोपनीयता भंग हुई है। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
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टीकाराम जूली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Politics:  राजस्थान विधानसभा में कथित रूप से "जासूसी कैमरे" लगाए जाने को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गुरुवार को सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा की गरिमा से खिलवाड़ किया गया है और इसके खिलाफ तुरंत उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

राज्यपाल को सौंपी शिकायत, सबूत भी पेश किए

जूली ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से मुलाकात की और दस्तावेजी साक्ष्य सौंपते हुए विधानसभा में लगे कैमरों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि विधानसभा परिसर को तुरंत सील किया जाए ताकि रिकॉर्डिंग या कैमरा सिस्टम से छेड़छाड़ न हो।

"अपग्रेड" नहीं, नए कैमरे और सिस्टम बदले गए: जूली

प्रेस वार्ता में जूली ने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि केवल पुराने कैमरों को अपग्रेड किया गया है, लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की टेंडर फाइलें कुछ और ही बयां करती हैं।

  • 5 कैमरों को बदला गया (30 लाख रु.)

  • समिति कक्षों में पूरा ऑडियो-वीडियो सिस्टम बदला (1.09 करोड़ रु.)

  • दो नए PTZ कैमरे (18.46 लाख रु.) लगाए गए जो सामान्य कार्यवाही से आगे तक की रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।

"स्पीकर कक्ष तक सीमित एक्सेस" से खड़ा हुआ विवाद

जूली के मुताबिक, नियमित 9 कैमरों की फीड जहां विधानसभा सचिवालय व सार्वजनिक प्रसारण तक सीमित है, वहीं ये दो नए कैमरे केवल स्पीकर के विश्राम कक्ष से जुड़े हैं। इससे ऑफ-द-रिकॉर्ड चर्चाओं की निगरानी की आशंका बढ़ गई है।

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यह भी पढें-  Politics: राजस्थान में जासूसी विपक्ष की 'प्रेमिका', सत्ता मिलते ही सब भूले, कब किस पर लगे आरोप? नया विवाद क्या

आपातकालीन कोटा और तेज़ भुगतान पर भी सवाल

जूली ने कहा कि इस खरीद प्रक्रिया में "आपातकालीन कोटा" का दुरुपयोग हुआ है। 22 अगस्त को टेंडर खोले गए और कुछ ही दिनों में भुगतान भी कर दिया गया। एक अधिकारी को निलंबित किया जाना भी इस पूरे मामले की संदिग्धता को दर्शाता है।

सर्वदलीय जांच समिति और हाईकोर्ट जज की मांग

उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक संयुक्त जांच समिति बनाई जाए जिसमें सत्ता पक्ष, विपक्ष, निर्दलीय, बसपा और लोकदल जैसे दलों के विधायक भी शामिल हों। साथ ही निष्पक्षता के लिए किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को भी समिति में शामिल किया जाए।

"अगर सरकार निर्दोष है, तो जांच से पीछे क्यों?"

जूली ने कहा, "अगर सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो उसे जांच का स्वागत करना चाहिए। अगर वह जांच से भागती है, तो यह साबित हो जाएगा कि वास्तव में जासूसी कैमरे लगाए गए हैं।"

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है और अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। यह कांग्रेस की नहीं, पूरे सदन की लड़ाई है। हम विधानसभा की गरिमा से समझौता नहीं होने देंगे।”

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