राजस्थान में SIR की घोषणा के साथ ही विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव टालने के लिए ही SIR की घोषणा करवाई है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग को चिट्ठी लिख कर यह बताया कि राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव पेंडिंग नहीं है इसलिए यहां SIR लागू कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों से पूछा था कि उनके यहां पंचायत व निकाय चुनाव पेडिंग तो नहीं है। राजस्थान ने आयोग को जवाब में मना कर दिया।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में 11390 ग्राम पंचायत, 22 जिला परिषद और 305 नगर निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकार यहां प्रशासक लगा चुकी है। डोटासरा ने कहा कि खुद यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा कई बार बयान चुके हैं कि पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार तैयार है और इसी साल इनकी घोषणा कर दी जाएगी। डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव 3 साल बाद होने हैं इसलिए अभी यहां SIR करवाने की कोई जल्दी नहीं थी। लेकिन सरकार की मंशा साफ है कि वह सिर्फ निकाय और पंचायत चुनाव टालने के मकसद से ही SIR करवा रही है।
डोटासरा ने दावा किया कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले SIR करवाना एक बड़ी साजिश है। उन्होंने कहा SIR में कांग्रेस से जुड़े वोटरों के नाम काटे जाने का षडयंत्र है, खास तौर पर अल्पसंख्यक और एससी वर्ग के वोट ताकि पंचायत चुनाव में हार से बचा जा सके। पहले वन नेशन वन इलेक्शन, इसके बाद परिसीमन फिर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और अब SIR के नाम पर पंचायत और निकाय चुनाव टालना चाहती है सरकार।
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डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। मतदाता सूची में सुधार के नाम पर दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साजिश है। दरअसल भाजपा को पंचायत और निकाय चुनावों में हार का डर सता रहा है, इसलिए कभी "एक राज्य, एक चुनाव" तो अब SIR की आड़ में चुनाव टालकर ग़रीबों का वोट छीनने का काम कर रहे हैं। वोटर लिस्ट फ्रीज हो जाएंगी एवं अगले साल 7 फरवरी तक फाइनल वोटर लिस्ट का पब्लिकेशन होगा, पूरी मशीनरी SIR में लगी रहेगी और इस दौरान OBC की गणना भी नहीं हो पाएगी। यानी स्पष्ट है कि सरकार की मंशा अनुरूप पंचायत व निकाय चुनाव अगले साल बजट के बाद मई-जून तक नहीं होंगे, जिसका विरोध कांग्रेस पार्टी लगातार कर रही है। 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के पश्चात चुनाव नहीं करवाना संविधान की खुली अवहेलना है। संविधान ने नागरिकों को वोट देने का अधिकार दिया है, लेकिन भाजपा अपने डबल इंजन के प्रभाव और चुनाव आयोग के जरिए इस अधिकार को छीनना चाहती है। ये लोग जनता की आवाज़ को दबाने, ग्रामीण व शहरी निकायों में ब्यूरोक्रेसी से मनमानी करने और लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करने में लगे हैं।
राजस्थान में निकाय व पंचायतों की स्थिति
- सभी 11390 ग्राम पंचायत कार्यकाल पूरा
-22 जिला परिषद दिसंबर तक खत्म हो चुका
-305 नगर निकाय में प्रशासक लगाए जा चुके हैं