राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रस्तावित एक कार्यक्रम को लेकर एनएसयूआई और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। एनएसयूआई ने इसे आरएसएस से जोड़कर विरोध जताया, जबकि भाजपा ने इसे नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम बताते हुए आरोप खारिज कर दिए हैं।
जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय में 3 अप्रैल को प्रस्तावित एक कार्यक्रम ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। एक तरफ एनएसयूआई ने इस आयोजन को आरएसएस से जोड़ते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है, तो दूसरी तरफ भाजपा ने इन आरोपों को बेबुनियाद और भ्रामक करार दिया है। दोनों पक्षों के बीच यह विवाद अब शैक्षणिक परिसर की सीमाएं लांघकर राजनीतिक अखाड़े में पहुंच गया है।
एनएसयूआई ने की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग
एनएसयूआई ने प्रशासन से मांग की है कि परिसर की निष्पक्षता बनाए रखी जाए और ऐसे आयोजनों को अनुमति न दी जाए। वहीं, भाजपा ने जयपुर जिला कार्यालय में प्रेस वार्ता कर एनएसयूआई के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा जिला महामंत्री रेखा राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम मरुधरा नारी सशक्तिकरण संगठन द्वारा आयोजित महिला सशक्तिकरण से जुड़ा आयोजन है और इसका आरएसएस से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि एनएसयूआई जानबूझकर इसे आरएसएस से जोड़कर भ्रामक माहौल बना रही है।
भाजपा बोली- माहौल खराब करने की कोशिश
भाजपा ने एनएसयूआई और कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का विरोध करने को महिला विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि एनएसयूआई के कुछ नेताओं ने फर्जी निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और उसका छात्र संगठन राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को अनावश्यक तूल दे रहे हैं।
पुलिस ने किया हल्का बल प्रयोग
एनएसयूआई के द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय में होने वाले कार्यक्रम को लेकर विरोध पुलिस के द्वारा हल्का बल प्रयोग कर एनएसयूआई छात्रों को खदेड़ा एनएसयूआई के कई छात्र गिरफ्तार किए गए, हालांकि पुलिस के द्वारा कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया। छात्रों को कहा गया था कि वह अपना प्रदर्शन जो है वह शांतिपूर्ण रखें पर छात्रों के द्वारा बेरीकेटिंग को तोड़ने का बैरीकेटिंग पर चढ़ने का प्रयास किया गया, जिसके चलते पुलिस को भी हल्का बल प्रयोग कर छात्रों को पीछे धकेलना पड़ा।
धरने के दौरान एनएसयूआई के छात्र आरएसएस मुर्दाबाद के नारे लगाते सुनाई दिए। छात्रों का कहना था कि कुछ भी हो जाए, विश्वविद्यालय को संघ की पृष्ठभूमि नहीं बनने देंगे। छात्रों का कहना था कि आज संघ अपना कार्यक्रम कर रहा है कि क्या कल राजस्थान विश्वविद्यालय अपना प्रांगण अलग अलग जातीय सम्मेलनों के लिए देना शुरू करेगा।