संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल
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राजस्थान सरकार के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लगाए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है। पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत संज्ञान लिया और अपने तीन वरिष्ठ नेताओं को मौके पर भेजा, जबकि कांग्रेस केवल धरना देकर हंसी-ठिठोली कर रही थी। उन्होंने गहलोत पर सवाल उठाते हुए कहा कि 15 साल के लंबे कार्यकाल में वह जोधपुर में इतना भव्य कार्यक्रम क्यों नहीं कर पाए।
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‘तीन बच्चों की मौत पर राजनीति कर रही कांग्रेस’
जोगाराम पटेल ने कहा कि तीन नाबालिग बच्चों की मृत्यु जैसे संवेदनशील मामले पर राजनीति करना ही वास्तविक असंवेदनशीलता है। उन्होंने गहलोत से यह पूछते हुए निशाना साधा कि उन्होंने अब तक कितनी घटनाओं में पीड़ित परिवारों के घर जाकर संवेदना जताई है। पटेल ने कहा कि गहलोत घटना के पांच दिन बाद परिवार के घर पहुंचे और इसे भी राजनीति का मंच बना लिया, जो बिल्कुल अशोभनीय है।
आईएएस प्रमोशन पर भी दी सफाई
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के उस आरोप पर कि प्रदेश सरकार ने चार आरएएस अधिकारियों को आईएएस में प्रमोट करते समय पक्षपात किया, पटेल ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी। स्क्रीनिंग कमेटी कांग्रेस कार्यकाल में बनी, 63 अधिकारियों की लिस्ट भी कांग्रेस सरकार में तैयार हुई और उन्हीं की स्क्रीनिंग कमेटी ने 20 नामों का चयन किया। पटेल ने कहा कि चार अधिकारियों को केवल उनकी योग्यता के आधार पर प्रमोट किया गया है, न कि किसी सिफारिश पर। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस बताए आखिर वह किसकी सिफारिश करवाना चाहती थी जो आज इतना विरोध कर रही है।
‘डोटासरा गमछा हिलाकर क्या साबित करना चाहते हैं?’
जोगाराम पटेल ने डोटासरा के बयानों और उनके अंदाज पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि डोटासरा ने पहले भी खूब गमछा हिलाया लेकिन उससे हुआ क्या। विधानसभा सत्र में भी वह आकर गमछा हिलाएं और देखें कि नतीजा क्या होता है। पटेल ने कहा कि विपक्ष यदि तर्कसंगत मुद्दे उठाएगा तो सरकार तार्किक जवाब देने को तैयार है, लेकिन यदि केवल हंगामा किया जाएगा तो उसका जवाब उसी अंदाज में दिया जाएगा।
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‘हम चाहते हैं विपक्ष सदन में मौजूद रहे’
डोटासरा के विधानसभा में शामिल होने को लेकर मंत्री ने कहा कि उन्होंने सदन के पटल पर जो कहा है, अगर उसका मान रखते हैं तो यह सवाल है कि वे कैसे आएंगे। फिर भी सरकार चाहती है कि वे सदन में मौजूद रहें और रचनात्मक बहस में भाग लें।