लंबे आंदोलन, किसानों के दबाव और सरकार के साथ कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार पांचना बांध का पानी नहरों तक पहुंच गया। सोमवार को पानी छोड़ने के दौरान आई तकनीकी खराबी को जल संसाधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमों ने पूरी रात युद्धस्तर पर काम कर दूर किया। मंगलवार तड़के 4:50 बजे उस गेट को भी सफलतापूर्वक खोल दिया गया, जिसमें तकनीकी दिक्कत आ रही थी। इसके बाद निर्धारित लिफ्ट, नहरों और नदी की ओर सभी गेट खोल दिए गए और नहरों में पानी का प्रवाह शुरू हो गया।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि जिन गेटों में पिछले करीब 20 वर्षों से तकनीकी खराबी के कारण संचालन नहीं हो पाया था, उन्हें भी इस अभियान के दौरान चालू कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इससे भविष्य में जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
पांचना बांध का पानी छोड़ने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से किसान लगातार आंदोलन कर रहे थे। किसानों ने नहरों में समय पर पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किए थे। इसके बाद सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, जिसमें तय समय पर पानी छोड़ने पर सहमति बनी थी। हालांकि रविवार को तकनीकी बाधा आने से पानी का प्रवाह शुरू नहीं हो सका, लेकिन रातभर चले अभियान के बाद समस्या दूर कर दी गई।
अब नहरों में पानी पहुंचने से करौली और आसपास के सिंचित क्षेत्रों के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आगे भी तकनीकी निगरानी जारी रहेगी।