गैस सिलिंडर बांटने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी का आदेश रद्द
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हनुमानगढ़ जिले के रावतसर उपखंड में रसोई गैस वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया। शिक्षक संगठनों की नाराजगी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच राज्य सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए उपखंड अधिकारी द्वारा जारी इस आदेश को निरस्त कर दिया।
गैस आपूर्ति को लेकर बनाया गया था कंट्रोल रूम
दरअसल, रावतसर के उपखंड अधिकारी ने देशव्यापी एलपीजी गैस आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं और आमजन को होने वाली असुविधा को देखते हुए तहसीलदार कार्यालय में एलपीजी निगरानी एवं समन्वय केंद्र, यानी कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इस व्यवस्था के तहत तीन शिक्षकों की ड्यूटी गैस वितरण व्यवस्था की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण के लिए लगाई गई थी। आदेश में उन्हें 14 मार्च 2026 से निर्धारित दायित्व पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
आदेश सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी फैल गई। उनका कहना था कि इस समय बोर्ड परीक्षाओं के कारण कॉपी जांच और परीक्षा ड्यूटी का दबाव पहले से ही है। ऐसे में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना उचित नहीं है।
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राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
मामले ने जल्द ही राजनीतिक रूप भी ले लिया। नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरी सरकार का बोझ सरकारी शिक्षकों के कंधों पर डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि एलपीजी की सप्लाई सरकार नहीं कर पा रही और अब आमजन के आक्रोश का सामना शिक्षकों को करना पड़ सकता है।
अन्य ड्यूटी का भी किया उल्लेख
टीका राम जूली ने यह भी कहा कि शिक्षकों को पहले भी कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी शिक्षकों को एसआईआर जैसी ड्यूटी में लगाया जाता है, कभी विद्यालयों से कुत्ते भगाने जैसे कार्य दिए जाते हैं और अब गैस वितरण से जुड़े कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जा रही है।
सरकार ने आदेश किया निरस्त
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए उपखंड अधिकारी द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया। आदेश रद्द होने के बाद शिक्षक संगठनों ने राहत की प्रतिक्रिया दी और दोबारा यह मांग दोहराई कि शिक्षकों को केवल शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।