राजस्थान में पंचायती राज चुनाव समय पर नहीं होने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव टालना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने जैसा है। उनका कहना है कि सरकार हार के डर से जनता के बीच जाने से बच रही है, जिसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि पंचायतों को समय पर फंड नहीं मिलने के कारण गांवों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्थानों पर नालियां जाम हैं, सीवर का पानी सड़कों पर बह रहा है और आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के नाम पर सरकार केवल दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद खराब है।
उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव में देरी से स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विकास कार्य ठप पड़े हैं और योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना है कि सरकार संवैधानिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए प्रक्रियात्मक बहानों का सहारा ले रही है।
स्वच्छता के मुद्दे पर भी उन्होंने केंद्र की स्वच्छ भारत अभियान योजना पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अभियान का प्रचार तो बड़े स्तर पर किया गया, लेकिन गांवों में इसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई जगह सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
पढ़ें- Rajasthan News: राजस्थान में RGHS भुगतान संकट गहराया, 15 मई से प्रदेशभर में पूर्ण बहिष्कार की चेतावनी
टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार को तुरंत पंचायती राज चुनाव करवाने चाहिए ताकि स्थानीय निकायों को अधिकार और संसाधन मिल सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में आने वाले समय में और भी गर्माहट देखने को मिल सकती है, क्योंकि ग्रामीण विकास और स्वच्छता जैसे विषय सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े हुए हैं।