‘2 साल बनाम 5 साल’ की राजनीतिक बहस के बीच सैटेलाइट अस्पतालों का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कानोता और अचरोल में प्रस्तावित सैटेलाइट अस्पतालों की योजना रद्द कर दी गई। उन्होंने कहा कि इन अस्पतालों की घोषणा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अप्रैल 2022 में की थी।
चार दिशाओं में अस्पताल खोलने की हुई थी घोषणा
अशोक गहलोत ने कहा कि जयपुर के SMS अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम करने और सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अप्रैल 2022 में जयपुर की चारों दिशाओं में सैटेलाइट अस्पताल खोलने की घोषणा की गई थी। इनमें दक्षिण में टोंक रोड पर शिवदासपुरा, पश्चिम में अजमेर रोड पर बालमुकुंदपुरा, पूर्व में आगरा रोड पर कानोता और उत्तर में दिल्ली रोड पर अचरोल शामिल थे।
उन्होंने बताया कि चारों सैटेलाइट अस्पतालों का कार्य कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हो गया था। बालमुकुंदपुरा और शिवदासपुरा में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था। उनका कहना है कि निर्माण पूर्ण होने के एक वर्ष बाद भी वर्तमान सरकार ने इन्हें जनता को समर्पित नहीं किया है।
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कानोता और अचरोल की योजना रद्द करने का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय भूमि आवंटन होने के बावजूद सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने कानोता और अचरोल के सैटेलाइट अस्पतालों को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि आगरा रोड और दिल्ली रोड पर सड़क दुर्घटनाएं अधिक होती हैं, ऐसे में इन क्षेत्रों में अस्पतालों की आवश्यकता थी।
गहलोत ने इसे भाजपा सरकार की अदूरदर्शिता और असंवेदनशीलता बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ‘2 साल बनाम 5 साल’ की कागजी बहस से बाहर निकलकर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दें।
चुनावी संदर्भ में भी दिया संकेत
अशोक गहलोत ने कहा कि यदि जनहित के महत्वपूर्ण कार्यों को बंद किया गया तो आगामी पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनावों में जनता का आक्रोश देखने को मिल सकता है। उन्होंने सरकार से योजनाओं को जारी रखने की अपील की।