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'मैं भी कहूं तो टिकट मत देना'; निकाय-पंचायत चुनाव में सिफारिश को लेकर गहलोत का बड़ा बयान

Tue, 18 Aug 2026 03:58 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव से पहले अशोक गहलोत ने कांग्रेस को सिफारिश के बजाय जमीनी हकीकत और मेरिट पर टिकट देने की सलाह दी। उन्होंने 50 फीसदी टिकट युवाओं को देने की पैरवी की।
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पूर्व सीएम अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन की कवायद तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी नेताओं को टिकट वितरण को लेकर दो टूक नसीहत दी है। गहलोत ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर की स्थिति और उसकी जीत की संभावना को देखते हुए होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वह खुद किसी उम्मीदवार की सिफारिश करें, तब भी केवल उनकी सिफारिश के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।

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गहलोत मंगलवार को कांग्रेस वॉर रूम में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है और लोगों में राज्य सरकार के प्रति नाराजगी है। ऐसे में यदि टिकट वितरण सही तरीके से हुआ तो कांग्रेस निकाय और पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

पर्यवेक्षकों को दिए जाएं पूरे अधिकार
गहलोत ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस को चुनाव के लिए भेजे जाने वाले पर्यवेक्षकों को पर्याप्त अधिकार देने चाहिए। उम्मीदवार चयन का फैसला स्थानीय परिस्थितियों, कार्यकर्ता की पकड़ और उसकी मेरिट के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'अगर सिफारिश के आधार पर टिकट दिया गया तो वह उम्मीदवार चुनाव हार जाएगा।' गहलोत ने कहा कि वास्तविक और सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही चुनाव मैदान में उतारना चाहिए, क्योंकि स्थानीय स्तर की राजनीतिक स्थिति का सही आकलन वहीं किया जा सकता है।

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'मैं भी सिफारिश करूं तो टिकट मत देना'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास जयपुर, भरतपुर और बीकानेर समेत अलग-अलग जगहों से लोग टिकट की सिफारिश कराने आते हैं। उन्होंने कहा कि किसी नेता के पास हर क्षेत्र की जमीनी जानकारी नहीं हो सकती।

गहलोत ने कहा कि अगर वह खुद किसी व्यक्ति की सिफारिश करें तो भी केवल उनकी सिफारिश के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और जीतने की क्षमता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

50 फीसदी टिकट युवाओं को देने की पैरवी

गहलोत ने टिकट वितरण में युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उन्होंने निकाय और पंचायत चुनाव में करीब 50 फीसदी टिकट युवाओं को देने की पैरवी की। गहलोत ने कहा कि युवाओं की भावनाओं को समझना और उन्हें राजनीतिक जिम्मेदारी देना जरूरी है।

वंदे मातरम विवाद पर बीजेपी पर हमला

गहलोत ने वंदे मातरम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर भी भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम से करीब 90 साल पुराना जुड़ाव है और पार्टी अपने कार्यक्रमों में लंबे समय से इसका गायन करती रही है।

उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग लंबे समय तक अपने कार्यालयों पर तिरंगा नहीं फहराते थे, वे आज कांग्रेस को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं। गहलोत ने दावा किया कि आजादी के आंदोलन के दौरान संघ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

अमित शाह के राजस्थान दौरे के दौरान सोनिया गांधी को लेकर दिए गए बयान पर भी गहलोत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने भारतीय संस्कृति और देश की राजनीतिक व्यवस्था को समझते हुए खुद को यहां की परिस्थितियों के अनुरूप ढाला है।

'हमारी सरकार में हुए ऐतिहासिक काम'

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की भी तारीफ की। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल में विकास के क्षेत्र में कोई बड़ा काम नहीं हुआ और लोग परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के समय करीब 12 लाख पट्टे बांटे गए थे। शहरों में मनरेगा की तर्ज पर रोजगार गारंटी योजना शुरू करने का भी उन्होंने दावा किया और कहा कि मौजूदा सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान में उनकी सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाएं और परियोजनाएं शुरू हुई थीं, लेकिन मौजूदा सरकार उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने यूडीएच विभाग को महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार पर इसकी उपेक्षा का आरोप लगाया।

स्कूलों में मीडिया की पाबंदी पर आदेश वापस लेने की मांग

गहलोत ने सरकारी स्कूलों में मीडिया और आमजन के प्रवेश को लेकर जारी दिशा-निर्देशों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से इन आदेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में प्रवेश के लिए भी अनुमति की व्यवस्था करना उचित नहीं है और यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। गहलोत ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए पेपर लीक रोकने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल हैं। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से काम करने की अपील की और कहा कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को लेकर इस तरह के आदेश जारी करना उचित नहीं है।

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