करौली जिले के ग्राम खण्डीप में पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चल रही किसान महापंचायत और धरना-प्रदर्शन रविवार को 17वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को समर्थन देने के लिए क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं, युवा और ग्रामीण महापंचायत स्थल पर पहुंचे।
ग्राम सेवा, जीवली, डोब, टोकसी सहित आसपास के गांवों से आए किसानों ने लोकगीतों और नारों के माध्यम से अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। आंदोलन स्थल पर पहुंचने वाले किसानों का पांचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति, क्षेत्र के पंच-पटेलों और विधायक रामकेश मीणा ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। धरना स्थल पर किसानों के साथ सर्वसमाज की भागीदारी भी देखने को मिली। ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने पेयजल, भोजन तथा अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रखी है, जिससे आंदोलन में शामिल लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है।
ये भी पढ़ें: राजस्थान: तेज रफ्तार ट्राले ने बाइक सवार युवक और मासूम को कुचला, मौके पर हुई दर्दनाक मौत
महापंचायत को संबोधित करते हुए विधायक रामकेश मीणा ने कहा कि किसानों की आवाज राजस्थान ही नहीं, बल्कि दिल्ली तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि पांचना बांध का पानी कमांड क्षेत्र के किसानों का अधिकार है और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशानुसार नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि किसानों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी के बल पर उन्हें उनका हक मिलेगा। रामकेश मीणा ने बताया कि पूर्व मंत्री गोलमा देवी पिछले तीन दिनों से धरना स्थल पर मौजूद रहकर किसानों का मनोबल बढ़ा रही हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राज्य सरकार से दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील का स्वागत करते हुए उनका आभार भी व्यक्त किया।
वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने अशोक गहलोत की टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गहलोत को इस मुद्दे पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी इस विवाद का समाधान नहीं हो सका था। राठौड़ ने आरोप लगाया कि इस विवाद की जड़ें पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पांचना बांध के पानी को लेकर जारी यह आंदोलन अब किसानों की मांग के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी केंद्र बन गया है। किसानों का कहना है कि जब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।