जयपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें जेजेएम घोटाले में फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को राजस्थान एसीबी की टीम ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। टीम उन्हें जल्द ही जयपुर लेकर आएगी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने इस मामले में चार फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसके बाद से एसीबी टीम सुबोध अग्रवाल की तलाश में लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी।इसी बीच एसीबी को सूचना मिली कि सुबोध अग्रवाल दिल्ली में मौजूद हैं। इनपुट के आधार पर टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें वहीं से पकड़ लिया। अब उनसे जयपुर लाकर पूछताछ की जाएगी।
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जेजेएम घोटाले में सुबोध अग्रवाल क्यूं फंसे ?
पूर्ववर्ती सरकार में जल जीवन मिशन में ठेकेदारों ने फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर हजारों करोड़ रुपए का भुगतान उठा लिया। इस मामले में पब्लिक एगेंस्ट करेप्शन ने सबसे पहले 27 जून 2023 को एसीबी और अशोक नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। इसमें शिकायत कर्ता एडवोकेट टीएन शर्मा थे। शिकायत कर्ता की तरफ से सुबोध अग्रवाल को सबसे पहले लिखित में शिकायत की गई थी कि जेजेएम में इरकॉन कंपनी के फर्जी सर्टिफिकेट लगाए गए हैं। इसके बाद इरकॉन कंपनी ने भी सुबोध अग्रवाल को पत्र लिखकर कहा था कि कंपनी के नाम पर जारी किए गए सर्टिफिकेट फर्जी हैं। लेकिन सुबोध अग्रवाल पूरे मामले को दबा गए। मामला कोर्ट में गया और 24 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए एसीबी से पूछा कि टीएन शर्मा की शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई थी। इसके बाद अक्टूबर 2024 को जेजेएम घोटाले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। इस एफआईआर में सुबोध अग्रवाल समेत कई लोगों के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद सुबोध अग्रवाल फरार हो गए। फिर इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया। अब जाकर इनकी गिरफ्तारी दिल्ली से हुई है।
11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि इस मामले में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार सामने आया है। वर्ष 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी फरार हैं। इसी कड़ी में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया है। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को नई दिल्ली से सार्वजनिक स्थान से हिरासत में लिया गया है।
फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर कई फर्मों को लाभ पहुंचाया
डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर कुछ फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 960 करोड़ रुपये का फायदा दिया गया। वहीं, 50 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर में मौके का निरीक्षण अनिवार्य होने के बावजूद निरीक्षण नहीं किया गया और पहचान छुपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पद का दुरुपयोग किया गया है। एसीबी ने बताया कि 17 फरवरी से फरार चल रहे आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही थी और उनके रिश्तेदारों व संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई।
तीन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किए गए
इस मामले में संजीव गुप्ता, जितेंद्र शर्मा और मुकेश गोयल के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं। एसीबी अब इनकी संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी करेगी। इधर, एसीबी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
965 करोड़ रुपए का जेजेएम घोटाला
जेजेएम के तहत हुए कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर एसीबी ने 17 फरवरी 2026 को बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। इस दौरान जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर के साथ-साथ बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच में फर्जी बिलिंग, वित्तीय गड़बड़ियों और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के प्रमाण सामने आए। इसी कार्रवाई के दौरान सुबोध अग्रवाल के ठिकानों पर भी दबिश दी गई थी। वहीं जलदाय विभाग के 9 अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था। इस दौरान सुबोध अग्रवाल अपने आवास पर नहीं मिले तो कार्रवाई के अगले दिन 18 फरवरी 2026 को सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था।