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Mahashivratri Spercial: शिवालयों में लगी भक्तों की कतारें, इस शिव मंदिर में हुआ था भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन

Wed, 26 Feb 2025 09:35 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

महाशिवरात्रि पर छोटी काशी कहे जाने वाले गुलाबी शहर जयपुर में आज सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। शिवालयों के आगे अलसुबह से ही शिव आराधना करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं। 
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5 हजार वर्ष पुराना है अंबिकेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिव आराधन करने वाले भक्तों के लिए आज सबसे बड़ा दिन है। महाशिवरात्रि के मौके पर आज देश भर में शिव मंदिरों में विशेष पूजा की जाएगी। वहीं शिव मंदिरों के लिए छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध राजधानी जयपुर में भी आज सुबह से ही शिवालयों के आगे लंबी कतारें लगी हैं।

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जयपुर क्यों है छोटी काशी

राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी स्थापना काल के समय से ही शिव मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां तक कि जयपुर की बसाहट से पूर्व जयपुर राजघराने की राजधानी आमेर में भी कई शिव मंदिरों की स्थापना की गई। जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय के समय में यहां कई शिव मंदिर बनवाए गए थे। यहां आमेर में अंबीकेश्वर महादेव,  मोती डूंगरी किले पर स्थित एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर, चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर, झारखंड महादेव मंदिर बेहद प्राचीन हैं। कई प्राचीन मंदिर दक्षिण शैली में बने हैं। कई मंदिरों को उसे बनवाने वाले के नाम से जाना जाता है। वहीं जयपुर की एक और खासियत है कि यहां लगभग हर मुख्य सड़क पर उस स्थान के नाम से शिव मंदिर बनाए गए। जैसे छोटी चौपड़ पर रोजगारेश्वर महादेव मंदिर और ब्रह्मपुरी में जागेश्वर महादेव मंदिर हैं।

अंबिकेश्वर महादेव- द्वापर युग में हुई थी स्थापना

आमेर का प्राचीन अंबिकेश्वर महादेव मंदिर सालों से भक्तों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में इस मंदिर की स्थापना की थी, जिसका उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है। बताया जाता है कि द्वापर युग में नंद बाबा और ग्वालों के साथ श्रीकृष्ण इस जगह आए थे और भगवान शिव की पूजा की थी। मान्यता यह भी है कि यहीं श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार हुआ था। ये मंदिर अपनी भव्यता के साथ ऐतिहासिकता के चलते प्रसिद्ध है और यहां दूर-दूर से भोले के भक्त आते हैं। ये मंदिर आमेर किले के पास सागर मार्ग पर स्थित है। इसी मंदिर के नाम पर इस जगह का नाम आमेर हुआ।
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ताड़केश्वर महादेव- स्वयंभू शिव

जयपुर के परकोटे में स्थित यह सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर है। इसे पहले  ताड़कनाथ के नाम से जाना जाता था। मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में ताड़ के पेड़ होने से इसका नाम ताड़केश्वर पड़ गया। यहां मौजूद शिवलिंग को स्वयंभू कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण जयपुर के वास्तुविद् दीवान विद्याधर चक्रवर्ती ने करवाया था।

राजराजेश्वर मंदिर- सिटी पैलेस

सिटी पैलेस में स्थित राजराजेश्वर मंदिर जयपुर राजपरिवार के अधीन है। इस मंदिर की स्थापना महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1865 ईस्वी में करवाई थी। यह मंदिर सिटी पैलेस की स्थापना के करीब 125 साल बाद बना था। इस मंदिर में शिव के परम तांत्रिक और सर्वोच्च शक्तिशाली शरभावतार का विशाल चित्र भी है।
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