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Vasundhara Raje: भाजपा में 'वफादारी बनाम अवसरवाद' की बहस तेज, वसुंधरा ने पार्टी में किसे बताया बड़ा खतरा?

Mon, 06 Apr 2026 03:38 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan Politics: बीजेपी के स्थापना दिवस पर वसुंधरा राजे ने संगठन के भीतर एक अहम वैचारिक बहस को हवा दे दी है। पार्टी में वफादारी बनाम अवसरवाद की लाइन खींचने वाले इस संबोधन को राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट लाइन खींचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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भाजपा मुख्यालय में वरिष्ठ नेत्री वसुंधरा राजे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा के स्थापना दिवस के मंच से वसुंधरा राजे ने संगठन की अंदरूनी राजनीति पर सीधे निशाना साधते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में पार्टी के भीतर पहचान और अवसर “विचारधारा और समर्पण” के आधार पर तय होने चाहिए, न कि दल बदलकर आए नेताओं के आधार पर।

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राजे ने कहा है कि 46 साल के सफर में भाजपा ने कई पड़ाव देखे। कई लोग भाजपा में आए तो कई वापस चले गए। कई लोगों ने दल बदला, तो कई लोगों ने दिल। कई लोग ऐसे भी हैं जो दल तो बदल लेते हैं, पर दिल नहीं। उनकी मानसिकता वही रहती है। इसलिए ये जरूरी है कि हम हमारी मूल विचारधारा के वफादार कार्यकर्ताओं को सम्मान दें। उन्हें ही महत्वपूर्ण स्थान दें। राजनीतिक नियुक्तियां और दायित्व उन्हीं कार्यकर्ताओं को दें जो मूल भाजपा के हैं। उन्होंने कहा कि जिनमें संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण के भाव हों, जिन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष किया है, जो पार्टी विचारधारा के हैं, ऐसे कार्यकर्ताओं को ही मौका मिले, अवसरवादियों को नहीं। 

राजे ने बिना नाम लिए उन नेताओं पर तीखा कटाक्ष किया जो बार-बार दल बदलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि “कुछ लोग दल तो बदल लेते हैं, लेकिन उनकी सोच नहीं बदलती”, जबकि असली कार्यकर्ता वे हैं जो संगठन में “दूध में शक्कर” की तरह घुल-मिल जाते हैं।

राजे का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर राजनीतिक नियुक्तियों और पदों को लेकर खींचतान की चर्चाएं तेज हैं। राजे ने साफ संकेत दिए कि अब प्राथमिकता उन कार्यकर्ताओं को मिलनी चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष किया है, न कि अवसर देखकर शामिल होने वालों को।

राजे ने संगठन को आगाह करते हुए कहा कि पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी विपक्ष नहीं, बल्कि अंदर मौजूद स्वार्थी प्रवृत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन से ज्यादा अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं, जो लंबे समय में पार्टी को कमजोर कर सकते हैं।

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कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पद के पीछे मत भागो, काम करो। काम करोगे तो पद खुद आपके पास आएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने उनकी मां विजया राजे सिंधिया को पार्टी की कमान सौंपनी चाही थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था।

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भैरोंसिह के योगदान को सराहा, बोलीं- अच्छा भाषण देने पर लड्डू बंटते थे
राजे ने पार्टी की वैचारिक विरासत का जिक्र करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, भैरों सिंह शेखावत और नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन की ताकत हमेशा विचारधारा और समर्पण से बनी है। उन्होंने कहा कि मैं पहली बार हाऊस के अंदर डर-डर कर अंग्रेजी बोलने वाली थी। लेकिन भाषण में ऐसे हिंदी के शब्द थे जो मैं बोल नहीं पा रही थी। लेकिन भैरोंसिंह शेखावत ने मुझे कहा कि आपको बोलना है बस। मैं डर-डर कर बोल रही थी। जब भाषण देकर बाहर आते थे हम सबसे टैक्स वसूली होती थी कि भाषण देकर आओ और एलएमबी के लड्डू मंगवा कर खिलाओ। 

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