कोटपूतली में बोरवेल में फंसी चेतना (3) को 170 फीट गहराई से दस दिन बाद बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि बच्ची की जान नहीं बच पाई। जिला प्रशासन की टीम ने बोरवेल के समानांतर एक सुरंग खोदकर बच्ची को बाहर निकाला।
दिशा भटकने से रेस्क्यू में देरी
रेस्क्यू टीमों ने सुरंग के जरिए चेतना तक पहुंचने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी खामियों और दिशा भटकने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। बुधवार सुबह अधिकारियों ने बोरवेल की लोकेशन ट्रेस करने का दावा किया। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) मशीन की मदद से बोरवेल की स्थिति को ट्रेस किया गया है। बहरहाल रेस्क्यू टीम के रास्ता भटकने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर सुरंग की दिशा गलत कैसे हुई? बहरहाल मासूम चेतना को बाहर निकाल लिया है और उसकी मौत हो गई।
अब तक के घटनाक्रम पर एक नजर
- 23 दिसंबर : दोपहर 2 बजे किरतपुरा के बड़ीयाली ढाणी में गिरी चेतना। सूचना मिलने पर पहुंची रेस्क्यू टीमें। रात 9 बजे एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया
- 24 दिसंबर : देसी जुगाड़ लगाकर 15 फीट ऊपर तक खींचा लेकिन फिर अटका ऑपरेशन।
- 25 दिसंबर : हरियाणा से आई पाइलिंग मशीन से बोरवेल के पास 40 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद बंद पड़ी मशीन। गुजरात से नई मशीन बुलाई गई। रात में उत्तराखंड से रैट माइनर्स टीम पहुंची।
- 26 दिसंबर : रैट माइनर्स टीम ने 170 फीट गहरा गड्ढा खोदकर सेफ्टी पाइप डाले।
- 27 दिसंबर : बारिश के कारण काम रुका।
- 28 दिसंबर : ऑक्सीजन लेवल चेक करने पाइप में उतरे दो जवान। एल आकार में सुरंग की खुदाई की।
- 29 दिसंबर : 4 फीट तक सुरंग खोदकर बोरवेल में उतरी रेस्क्यू टीम। सुरंग बनाने में पत्थर बने सबसे बड़ी बाधा। पत्थर तोड़ने के लिए मशीन मंगाई।
- 30 दिसंबर : एसडीआरएफ के कमांडेंट ने रेस्पिरेशन चेक किया। लेजर अलाइनमेंट डिवाइस से जांच की।
- 31 दिसंबर : दोपहर बाद पता चला कि गलत दिशा में हो रही थी खुदाई। लोकेशन ट्रेक करने के लिए जीपीआर मशीन मंगाई।