जोधपुर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि तीनों घटनाएं अलग हैं। सिजेरियन बढ़ने की वजह युवा पीढ़ी का लेबर पेन से बचना बताया।
कोटा, बीकानेर और जोधपुर में प्रसूताओं की मौतें क्यों हो रही हैं, महकमें के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पास भले इस बात का जवाब नहीं है लेकिन उनके पास विवाद बढ़ाने वाले बयानों की लंबी फेहरिस्त जरूर है।
खींवसर ने बताया कि जोधपुर में जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी, उनमें से छह की स्थिति सामान्य है। एक महिला को गंभीर मधुमेह के कारण बेहतर उपचार के लिए एम्स जोधपुर रेफर किया गया है, जबकि एक अन्य महिला का पीलिया का उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
खींवसर ने कहा कि कई महिलाएं गंभीर स्थिति में लंबी दूरी तय कर सरकारी अस्पतालों तक पहुंचती हैं। ऐसे मामलों का उपचार चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट होता है कि लोगों का बड़े सरकारी अस्पतालों और वहां उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं पर भरोसा बना हुआ है।
गौरतलब है इससे पहले भी प्रसूताओं की मौतों के मामले में खींवसर के दिए बयान से विवाद छिड़ गया था। बीकानेर के पीबीएम में प्रसूताओं की मौतों को लेकर जब मीडिया ने संभावित लापरवाही को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने सीधे जवाब देने के बजाय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र वर्मा की ओर देखते हुए कहा- बताइए प्रिंसिपल साहब, गर्भवती महिलाएं गंभीर हालत में आई थीं या नाचते हुए आई थीं।