भारतीय क्रिकेट इतिहास के दिग्गज मोहिंदर अमरनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक "फीयरलेस" हाल ही में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक को उनके भाई राजिंदर अमरनाथ ने लिखा है, जिसमें मोहिंदर अमरनाथ, उनके पिता लाला अमरनाथ और भारतीय क्रिकेट से जुड़े कई अनसुने किस्सों का जिक्र किया गया है। अमर उजाला के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में मोहिंदर और राजिंदर अमरनाथ ने साझा किए खास अनुभव।
अमर उजाला से खास बातचीत में राजिंदर ने बताया कि उनके पिता लाला अमरनाथ हमेशा से चाहते थे कि मोहिंदर क्रिकेट में बड़ा नाम कमाए। उन्होंने मोहिंदर को क्रिकेटर बनाने में पूरा सहयोग दिया लेकिन क्रिकेट की दुनिया में पहचान बनाना कभी आसान नहीं रहा। "फीयरलेस" में मोहिंदर अमरनाथ के संघर्ष, उनकी मेहनत और क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण की पूरी कहानी बयां की गई है।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान मोहिंदर अमरनाथ ने क्रिकेट के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हर फॉर्मेट के हिसाब से टीम बननी चाहिए, लेकिन मूल खेल के सिद्धांत नहीं बदलने चाहिए। उन्होंने क्रिकेट की तुलना फुटबॉल से करते हुए कहा कि फुटबॉल में तेजी से चीजें बदली हैं, लेकिन उसके नियम नहीं बदले गए। क्रिकेट का फॉर्मेट बदला जा सकता है, लेकिन मैदान और नियमों में बदलाव नहीं होना चाहिए। क्रिकेट के फॉर्मेट में बदलाव करके कोई स्टार नहीं बन सकता, स्टार बनने के लिए मेहनत और समर्पण जरूरी है।
क्रिकेट में आईपीएल के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर करते हुए मोहिंदर ने कहा कि बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के माता-पिता की नजर में आईपीएल ही सब कुछ हो गया है। अब देश के लिए खेलना सेकंडरी हो गया है, जबकि असली क्रिकेट देश के लिए खेलना ही है। युवा खिलाड़ियों को देश के लिए खेलने को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि सिर्फ आईपीएल को करियर का अंतिम लक्ष्य समझना चाहिए। क्रिकेट में स्टारडम सिर्फ ग्लैमर या टी-20 फॉर्मेट से नहीं, बल्कि सच्चे संघर्ष और समर्पण से आता है।
राजिंदर अमरनाथ की लिखी "फीयरलेस" न सिर्फ मोहिंदर अमरनाथ के करियर पर रोशनी डालती है, बल्कि यह किताब भारतीय क्रिकेट के सुनहरे दौर की भी झलक दिखाती है। इसमें क्रिकेटप्रेमियों को उन संघर्षों की कहानी मिलेगी, जिनसे गुजरकर एक खिलाड़ी बड़ा बनता है। यह किताब क्रिकेट प्रेमियों, युवा खिलाड़ियों और खेल जगत में रुचि रखने वालों के लिए बेहद प्रेरणादायक साबित हो सकती है।