फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

JLF 2025 Exclusive : कैलाश सत्यार्थी के जीवन संघर्ष की दास्तान है "दियासलाई", जेएलएफ में साझा किए अनुभव

Sat, 01 Feb 2025 04:38 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जेएलएफ में अपनी पुस्तक दियासलाई के साथ पधारे नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साथ अमर उजाला ने एक्सक्लूसिव बातचीत की। अपने जीवन संघर्ष को लेकर क्या बोले सत्यार्थी, जानिये यहां
विज्ञापन
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमर उजाला ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से खास बातचीत की। इस सत्र में उन्होंने अपनी किताब "दियासलाई" के बारे में चर्चा करते हुए अपने जीवन के संघर्ष, समाज में बदलाव की जरूरत और बच्चों के अधिकारों के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।

विज्ञापन




सत्यार्थी ने "दियासलाई" की तुलना एक मार्गदर्शक दीपक से की। उनका मानना है कि मोमबत्ती और अगरबत्ती को जलाने के लिए दियासलाई की जरूरत पड़ती है। "दियासलाई" वह चीज है, जो दूसरों को मार्ग दिखाने का काम करती है। उन्होंने इस पुस्तक के जरिए समाज में बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के संघर्ष को बयान किया।

उन्होंने अपने को देशद्रोही करार दिए जाने के अनुभव को साझा करते हुए गांधीजी का उद्धरण याद किया और कहा कि जब कोई नई चीज की जाती है तो उसे पहले अनदेखा किया जाएगा। फिर उसका विरोध होगा। फिर आप पर हमले होंगे। फिर अंत में आप जीतेंगे। सत्यार्थी ने इस संघर्ष के दौरान अपने ऊपर किए गए हमलों को और समाज के विरोध को अपने कार्यों का एक हिस्सा माना।
विज्ञापन


मिर्जापुर के गलीचा उद्योग में बच्चों के शोषण के मुद्दे को लेकर उन्होंने बताया कि उस समय गलीचे विदेशों में सबसे ज्यादा भेजे जाते थे और बच्चों का शोषण किया जाता था। उन्होंने इस उद्योग में बच्चों के कामकाजी अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा, "तब मुझे यूरोप का एजेंट बताया गया। फिर मुझे आईएसआई का एजेंट कहा गया।" उन्होंने पाकिस्तान में भी इस उद्योग में बच्चों के शोषण के खिलाफ अभियान चलाया था।

फूलन देवी के साथ अपने रिश्ते को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका चुनावी अभियान भी कालीन उद्योग से जुड़े लोगों को लेकर था इसलिए वो भी मुझे अपना दुश्मन मानती थीं। यह संघर्ष उस समय बहुत बड़ा मुद्दा बन गया था और सत्यार्थी को इस कारण भी आलोचना का सामना करना पड़ा।

अपने परिवार के बारे में बात करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि उस समय उनकी शादी हो चुकी थी और परिवार को डर था कि इस संघर्ष के कारण उनका जीवन मुश्किल हो सकता है। लेकिन सत्यार्थी ने यह महसूस किया कि यह उनका काम है और उन्हें अपने परिवार के डर को पार करके "दियासलाई" बनना था।

एक और दिलचस्प घटना साझा करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि जब उन्होंने एक सर्कस से बच्चों को छुड़ाया था उस दौरान सर्कस के मालिक ने उन पर पिस्तौल तान दी थी, लेकिन अचानक एक कैमरामैन सामने आ गया। इस घटना में कैलाश सत्यार्थी तो बच गए, लेकिन कैमरामैन के साथ विवाद हो गया।

उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए हर किसी को "दियासलाई" बनना होगा और इसके लिए समाज में बदलाव लाना जरूरी है। उनका मानना था कि अगर हमें बच्चों का शोषण रोकना है तो हमें जागरूकता और संघर्ष से काम करना होगा।

इस बातचीत में कैलाश सत्यार्थी ने न केवल अपने संघर्ष की कहानी साझा की, बल्कि "दियासलाई" के माध्यम से समाज को एक नया दृष्टिकोण भी दिया, जो बच्चों के अधिकारों की रक्षा और शोषण से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें