राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी, पदमचंद जैन, महेश मित्तल, संजय बड़ाया, विशाल सक्सेना व उनके परिवार के अन्य सदस्यों एवं सहयोगी कंपनियों की संपत्ति ईडी ने कुर्क कर दी है। जल जीवन मिशन घोटाले के इन आरोपियों पर धन संशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बुधवार को ईडी ने अनंतिम आदेश जारी किया था।
ईडी ने शुक्रवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। इन आरोपियों की कुर्क की गई संपत्ति का बाजार मूल्य 47 करोड़ रुपए से अधिक का बताया गया है। ईडी के अनुसार कुर्क संपत्ति में कृषि भूमि, आवासीय फ्लैट और मकान शामिल हैं। ईडी ने अप्रैल में महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में बिचौलिए संजय बड़ाया, गणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक महेश मित्तल और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के मालिक पदमचंद जैन के साथ पीयूष जैन नाम के व्यक्तियों को ईडी पहले ही जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार कर चुकी थी।
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गौरतलब है कि पूर्ववर्ती सरकार में महेश जोशी पीएचईडी मंत्री थे। इस दौरान फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट के जरिए जल जीवन मिशन में 600 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया। ईडी के अनुसार मामले के आरोपी पीएचईडी ठेके हासिल करने के लिए भारतीय रेलवे कंस्ट्रक्शन इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल भी कर रहे थे।
जांच एजेंसी ने कहा कि महेश जोशी ने अपने करीबी सहयोगी संजय बड़ाया के साथ मिलीभगत करके जेजेएम कार्यों से जुड़े ठेके जारी करने और विभिन्न अनियमितताएं छिपाने के लिए पदमचंद जैन और महेश मित्तल जैसे ठेकेदारों से अनुचित लाभ हासिल किया। ईडी ने दावा किया कि महेश जोशी ने इन ठेकेदारों से निविदा राशि का दो से तीन प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में लिया ताकि अनियमितताओं को छिपाया जा सके। जल जीवन मिशन घोटाले में सबसे पहले राजस्थान में एसीबी में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी के आधार पर ईडी ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी।