झालावाड़ के पिपलोदी गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में दीवार गिरने से एक छात्रा की मौत और तीन बच्चों के घायल होने के 24 घंटे के भीतर जिला शिक्षा प्रशासन ने खुद को क्लीन चिट दे दी है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हादसे की जिम्मेदारी 1997 में ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए कक्षों पर डाल दी गई, जबकि शिक्षा विभाग ने अपने निर्माणों को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में दीवार गिरने से एक छात्रा की मौत और तीन बच्चों के घायल होने की घटना के महज 24 घंटे के भीतर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने खुद को क्लीन चिट दे दी है। शुक्रवार को जारी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हादसे की सीधी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर डाल दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो कमरे हादसे का शिकार हुए, वे वर्ष 1997 में ग्राम पंचायत द्वारा बनवाए गए थे। प्रशासन का दावा है कि शिक्षा विभाग द्वारा बाद में निर्मित कक्ष पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे तय मानकों के अनुसार बने हैं।
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1997 का निर्माण, 2024 में हादसा — लेकिन जवाबदेही कौन लेगा?
प्रशासन ने बताया कि हादसे वाले दो कमरे 1997 में ग्राम पंचायत ने बनवाए थे। इन्हीं में से एक कमरे की दीवार गिरने से छात्रा की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भवन न तो जर्जर भवनों की सूची में शामिल था और न ही हाल के वर्षों में इसकी कोई मरम्मत हुई थी।
जिम्मेदारी से पीछे हटा विभाग, पंचायत पर आरोप तय
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि हादसे वाले पुराने भवन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि विभाग द्वारा बनाए गए भवन सुरक्षित हैं और इंजीनियरिंग के मानकों पर खरे उतरते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग पुराने निर्माण से पल्ला झाड़ना चाहता है।
गांववालों का गुस्सा: "मरने के बाद रिपोर्टें क्यों बनती हैं?"
गांव के लोगों का कहना है कि स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन को सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक ग्रामीण ने कहा, "अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब सब अपनी जिम्मेदारी से बचने में लगे हैं।" हादसे के बाद सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रिपोर्ट को "रूटीन क्लीन चिट प्रक्रिया" करार दिया और कहा कि यदि शिक्षा विभाग ने समय रहते कदम उठाया होता, तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा, "प्रशासन केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर जवाबदेह बने, तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी।"