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राजस्थान में आग का कहर: 30 दिन में तीन बड़े हादसे, बड़ा सवाल कब दुरुस्त होंगे सुरक्षा इंतजाम?

Wed, 15 Oct 2025 05:13 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

एसएमएस अस्पताल, जयपुर-अजमेर हाईवे और उसके बाद जैसलमेर बस हादसा.... अक्टूबर महीने में हुए इन तीन हादसों ने करीब 40 जिंदगियां लील लीं। इन तीनों ही हादसों के बीच बस एक सवाल समाने आया- कब दुरुस्त होंगे सुरक्षा इंतजाम?
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राजस्थान में आग का कहर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान इन दिनों आग के तांडव से दहला हुआ है। एक तरफ राजधानी जयपुर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एसएमएस आग की लपटों में घिर गया तो दूसरी ओर अजमेर हाईवे पर टैंकर और सिलेंडर से भर ट्रक की टक्कर से हुए धमाकों से पूरा इलाके में हड़कंप मच गया। और अब कल जैसलमेर-जोधपुर रोड पर फिर मौत ने अपना तांडव दिखाया, जिसमें करीब 20 जिंदगियां खत्म हो गईं।
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इस एक महीने के भीतर हुई तीन बड़ी आगजनी की घटनाओं ने प्रदेश को अंदर तक झकझोर दिया है और साथ ही यह सवाल भी छोड़ दिया है कि आखिर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कब होगी?

एसएमएस अस्पताल अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
एसएमएस में हुआ अग्निकांड

इन तीनों हादसों पर नजर डालें तो सबसे पहला हादसा महीने के शुरुआत में 6 अक्टूबर को एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में हुआ, जहां लगी आग से आठ मरीजों की जान चली गई। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगी आग ने यह साबित कर दिया कि अस्पताल जैसी जगह पर आग से सुरक्षा मानकों की कितनी अनदेखी की जा रही है।

शॉर्ट सर्किट से लगी इस आग में 8 मरीजों की मौत हो गई थी, जिनमें 2 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल थे। आग लगने के बाद आईसीयू में जहरीला धुआं भर गया और दम घुटने से मरीजों की जान चली गई। हादसे के वक्त वार्ड में 24 मरीज भर्ती थे।

सबसे बड़ी बात ये घटना प्रदेश के सबसे बड़े माने जाने वाले सरकारी अस्पताल में हुई, जहां सुरक्षा इंतजामों पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं।

 

जयपुर अजमेर हाईवे पर 200 सिलेंडर फटे - फोटो : अमर उजाला
जयपुर-अजमेर हाईवे पर हुए सिलेंडर धमाके

एसएमएस अस्पताल की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि 8 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे जयपुर-अजमेर हाईवे पर एलपीजी सिलेंडर से भरे एक ट्रक को पीछे से एक केमिकल टैंकर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टैंकर के केबिन में आग लग गई और फिर एक के बाद एक सिलेंडरों में धमाके होने लगे।

हादसे में करीब 200 सिलेंडर फट गए, जिनके टुकड़े 500 मीटर दूर खेतों में जा गिरे। धमाकों की आवाजें करीब 10 किलोमीटर दूर तक सुनी गईं। हादसे में टैंकर चालक रामराज मीणा (35) जिंदा जल गया, जबकि पांच अन्य लोग घायल हो गए। आग पर काबू पाने में दमकल की 12 गाड़ियों को लगभग तीन घंटे का समय लगा। यदि आग आसपास की आबादी तक पहुंच जाती, तो जनहानि और भयावह हो सकती थी।

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जैसलमेर बस हादसा - फोटो : अमर उजाला
जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर काल का ग्रास बनीं 20 जिंदगियां

इन दोनों हादसों के बाद कल दोपहर जैसलमेर से जोधपुर आ रही केके ट्रैवल्स की बस थईयात गांव के पास अचानक आग की लपटों में घिर गई और कुछ ही मिनटों में राख में बदल गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शव बस में बुरी तरह चिपक गए।

इस दिल दहला देने वाली घटना में पति-पत्नी और तीन मासूमों का पूरा परिवार आग की भेंट चढ़ गया। बहरहाल मृतकों की पहचान के लिए दो करीबी परिजनों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। अस्पतालों में परिजनों की चीख-पुकार और बदहवासी इस त्रासदी की गहराई बयान कर रही है।

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घायलों के हाल जानने पहुंचे सीएम - फोटो : अमर उजाला
तीन हादसे, एक सवाल 

एक महीने के भीतर हुए इन तीन हादसों को लेकर केवल एक ही सवाल सामने आ रहा है कि क्या राजस्थान के सिस्टम को अब भी झटका नहीं लगा? तीनों हादसों के बीच जो एक समान तस्वीर सामने आई है, उसमें लापरवाही, सिस्टम की देरी और हादसे के बाद मचे अफरा-तफरी के हालात शामिल हैं।

एसएमएस अस्पताल में जहां फायर अलार्म और अग्निशमन यंत्र निष्क्रिय मिले। वहीं अजमेर हाईवे पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते हादसा हुआ। जैसलमेर हादसे की तरफ भी देखें तो यहां भी सुरक्षा मानकों की ढिलाई के साथ ही ग्रीन कॉरिडोर के बावजूद एंबुलेंस की लेट-लतीफी ने मरीजों की हालत बिगाड़ दी। प्रदेश के इन तीन हादसों ने व्यवस्था को सच्चाई का आईना दिखाया है।

जरूरत है जवाबों की

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आग से जलती ये घटनाएं केवल संयोग नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का संकेत हैं। हर हादसे के बाद मुआवजे और जांच की घोषणाएं तो हो जाती हैं लेकिन अगली घटना होने तक कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। इन हादसों के बाद अब आम जनता के मन में केवल एक ही सवाल है- “कब तक जलते रहेंगे इंसान और सोती रहेगी व्यवस्था?”

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