आरयूएचएस जयपुर में एमबीबीएस बैच 2026 के नए विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट एवं कैडेवरिक ओथ सेरेमनी आयोजित की गई। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि सफेद कोट मरीजों के भरोसे और चिकित्सक के समर्पण का प्रतीक है।
राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) में बुधवार को एमबीबीएस बैच 2026 के नए विद्यार्थियों के लिए ‘व्हाइट कोट एवं कैडेवरिक ओथ सेरेमनी’ आयोजित की गई। समारोह में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विद्यार्थियों को चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारी और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सफेद कोट केवल परिधान नहीं, बल्कि मरीज के विश्वास, आशा और चिकित्सक के समर्पण का प्रतीक है।
मरीज का हित हो सबसे पहली प्राथमिकता
मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सा का पेशा दूसरे व्यवसायों से अलग है। इसमें सेवा के प्रति प्रतिबद्धता, जुनून और समर्पण जरूरी है। अस्पताल आने वाले मरीज सफेद कोट में जीवन बचने की उम्मीद और दर्द से राहत का भरोसा देखते हैं। कोट पहनने के बाद चिकित्सक को अपने व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों और समस्याओं से ऊपर उठकर मरीज के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने वरिष्ठ और कनिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सकों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि कई बार डॉक्टर लगातार 48 से 72 घंटे तक घर गए बिना अस्पताल में सेवाएं देते हैं। यह चिकित्सा पेशे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
तकनीक के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी
श्रीनिवास ने ‘चरक शपथ’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय चिकित्सा परंपरा में सहानुभूति और निस्वार्थ सेवा को हमेशा महत्व दिया गया है। आज चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल अस्पतालों का दौर है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल मरीजों की सुविधा के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था के केंद्र में हमेशा मरीज ही रहना चाहिए।
मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों को शिक्षकों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने, पुस्तकालय में समय बिताने और नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ बेहतर तालमेल से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित राजस्थान’ और ‘हेल्थ फॉर ऑल’ के लक्ष्य को पूरा करने में युवा चिकित्सकों की अहम भूमिका होगी।
सफलता के लिए नियमित मेहनत और संतुलित दिनचर्या जरूरी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उत्कृष्टता हासिल करने के लिए लगातार मेहनत और अनुशासन जरूरी है। उन्होंने तनाव से बचने के लिए योग, माइंडफुलनेस, जिम और खेलकूद को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही लेखन और ललित कला जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहने को भी कहा।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव का किया जिक्र
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल पर श्रीनिवास ने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और राज्य सरकार के प्रयासों से ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में बदलाव आया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एएनएम की उपलब्धता, टीकाकरण और प्रसवपूर्व देखभाल पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का विस्तार हो रहा है। उनके अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 100 बेड, जिला अस्पतालों में 500 बेड और मेडिकल कॉलेजों में 2,000 से अधिक बेड की क्षमता वाले संस्थान विकसित हो रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने को बदलाव लाने का अवसर मानने की अपील की।
शोध और पढ़ाई पर भी दिया जोर
मुख्य सचिव ने चिकित्सा शिक्षा में अकादमिक उत्कृष्टता और शोध के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘द लैंसेट’ और नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रकाशन पढ़ने, सेमिनार और कार्यशालाओं में भाग लेने तथा प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बी. राममूर्ति की जीवनी से प्रेरणा लेने का सुझाव दिया।