रजत पथ मानसरोवर स्थित कैफे अरवन थडी के संचालक सहित तीन पुलिसकर्मियों को अवैध वसूली के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) जयपुर राजर्षि राज, आईपीएस के निर्देशन में की गई। मामला पुलिस थाना मानसरोवर जयपुर दक्षिण में दर्ज प्रकरण संख्या 1035/2025 से जुड़ा है, जिसमें बीएनएस की धारा 308(2) और 61(2) के तहत अनुसंधान किया जा रहा है।
डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 को परिवादी गोपाल सिंह गुर्जर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। परिवादी ने बताया कि वह अपने दोस्त योगेश पटेल के साथ भारत माता सर्किल रोड पर थार गाड़ी में घूम रहा था, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, नौकरी से बर्खास्त करवाने की धमकी दी और पैसे की मांग करने लगे। परिवादी डर गया, क्योंकि उसके पास पीजी प्लॉट खरीदने के लिए बड़ी राशि मौजूद थी, जिसकी जानकारी उसके दोस्त योगेश को थी।
शिकायत के अनुसार, डराने-धमकाने के बाद योगेश ने परिवादी के छोटे भाई सुनील को होस्टल से पैसे मंगवाने भेजा।
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बाद में स्वर्ण गार्डन के सामने पुलिसकर्मी परिवादी को एक सफेद गाड़ी में बैठाकर ले गए। कुछ समय बाद पुलिसकर्मियों ने दावा किया कि योगेश से उन्हें पैसे मिल गए हैं और परिवादी को मेट्रो स्टेशन के पास छोड़ दिया गया। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परिवादी और उसके दोस्त योगेश गुर्जर के बीच पहले से पैसों का लेन-देन विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते योगेश ने अपने चचेरे भाई पवन कुमार गुर्जर, जो रजत पथ स्थित कैफे अरवन थडी का संचालक है, और उसके परिचित पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर साजिश रची। योजना के अनुसार योगेश ही परिवादी को थार गाड़ी में लेकर आया और नाटकीय घटनाक्रम रचते हुए मौके से फरार हो गया, जबकि वह पीजी से पैसे लेकर निकल गया।
अनुसंधान में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता प्रथम दृष्टया प्रमाणित होने पर कैफे संचालक पवन कुमार गुर्जर सहित तीन पुलिसकर्मियों बाबूलाल मीणा, केलाश चन्द और अनिल कुमार रागेरा को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।