राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहे कथित घोटालों और अनियमितताओं को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर जारी धरने के दौरान बेनीवाल ने कहा, पूरे कुएं में भांग मिली है, अब पूरे सिस्टम को बदलना जरूरी हो गया है।
बेनीवाल ने आरएएस 2021 और जेटीए 2024 परीक्षाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने मीडिया को आरएएस मेंस की उत्तर पुस्तिका दिखाते हुए बताया कि खाली छोड़े गए उत्तर पर भी नंबर दिए गए हैं। उनका कहना है कि आरपीएससी पैसे लेकर 0 को 7 नंबर बना देता है।
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उन्होंने आरपीएससी चेयरमैन और सदस्यों की भूमिका को संदिग्ध बताया और सवाल उठाया कि यदि कोई सदस्य भ्रष्टाचार में पकड़ा जाता है तो क्या चेयरमैन अंजान हो सकता है? बेनीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग में केवल आदिवासी और पिछड़ी जातियों के सदस्यों पर ही कार्रवाई होती है, जो जातीय भेदभाव का संकेत है।
जेटीए परीक्षा में ओएमआर शीट पर परीक्षार्थी और वीक्षक के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी बेनीवाल ने कहा कि यह नया चीटिंग मॉडल है, जिससे बाद में ओएमआर बदलकर मनचाहे अभ्यर्थी को पास किया जा सकता है। उन्होंने राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन आलोक राज को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की।
धरने के दौरान सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन भी किया गया, जिसमें रालोपा कार्यकर्ताओं और अभ्यर्थियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य सरकार और आयोगों को सद्बुद्धि प्राप्त हो, यही प्रार्थना करना बाकी रह गया है।
बेनीवाल ने आरएएस 2018 की उत्तर पुस्तिकाओं में भी अनियमितता का मुद्दा उठाया और सभी कॉपियों को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने भाजपा आईटी सेल पर आरोप लगाया कि वे उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर समाजों के बीच खाई पैदा कर रहे हैं। सांसद ने स्पष्ट किया कि वे पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के पक्षधर हैं और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।