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Jaipur News: कुंभ से निकलकर मीन राशि में शनि का होगा प्रवेश, जानें जनता से लेकर सत्ता तक क्या होगा असर

Mon, 17 Mar 2025 09:42 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

कर्मफल दाता और न्याय के देवता कहे जाने वाले शनिदेव इस साल 29 मार्च को राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। इसके प्रभाव को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं हो रही हैं। आइए जानते हैं क्या कहना है राजस्थान ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के महासचिव, प्रोफेसर विनोद शास्त्री का।
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प्रोफेसर विनोद शास्त्री। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश और दुनिया में ज्योतिष को समझने वाले और इसमें रुचि रखने वाले करोड़ों लोगों की नजर मार्च में होने वाले शनि के राशि परिवर्तन पर है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि 29 मार्च को शनि कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि मीन राशि में शनि का जब प्रवेश हो रहा है तो वहां चार गृह राहू, बुध, सूर्य और शुक्र पहले से ही मौजूद हैं। शनि के मीन में प्रवेश करने के साथ यहां पांच ग्रहों की आपस में टक्कर होगी। शनि एक वायु ग्रह है इसलिए इसका गोचर इंसान, जानवर और प्रकृति सब पर अपना असर डालता है। राजस्थान ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के महासचिव, प्रोफेसर विनोद शास्त्री बताते हैं कि शनि का यह गोचर आम इंसान, नौकरी पेशा, कारोबारी, पशु-पक्षी और सियासतदान सब पर अपना जबरदस्त प्रभाव डालने वाला है।

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अन्य ग्रहों के मुकाबले क्यों महत्वपूर्ण है शनि का गोचर
प्रोफेसर विनोद शास्त्री का कहना है कि अन्य ग्रहों के मुकाबले शनि का राशि परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह न्यायाधीश कहलाता है। ये आम जनता का ग्रह है। यह प्रकृति को भी प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में इसका राशि परिवर्तन बहुत ही महत्वपूर्ण है। शनि जब मीन राशि में आता है तो मेष राशि वालों के लिए इसकी ढइया शुरू होती है। मीन राशि वालों को धड़ पर रहती है और कुंभ राशि वालों को उतरती हुई पैर पर रहती है। मकर राशि वालों को साढ़े साती उतर जाएगी।

हमेशा अनिष्कारी नहीं होती साढ़े साती और ढइया
साढ़े साती के साथ ही सिंह और धनु राशि वालों को ढइया प्रारंभ हो जाएगा। आमतौर पर शनि की ढइया को लेकर लोग परेशान होते हैं, लेकिन प्रोफेसर शास्त्री का कहना है कि शनि का ढईया और साढ़े साती हमेशा ही अनिष्टकारी नहीं होती है। शनि ने किस पाए में प्रवेश किया है उसके आधार पर उनके प्रभाव जाने जाते हैं। शनि को लेकर बेमतलब का हौआ खड़ा किया जाता है। यह बहुत ही लिबरल ग्रह है। शनि में बहुत ही सहनशीलता है। शनि अन्य ग्रहों के आधार पर स्वभाव को परिवर्तन कर लेता है।
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लोकतंत्र का अधिष्ठाता ग्रह है शनि: राशि परिवर्तन से हिलेगी सत्ता
प्रोफेसर शास्त्री का कहना है कि शनि एक वायु ग्रह है, न्यायाधीश है और लोकतांत्रिक प्रणाली का अधिष्ठाता भी है। इसलिए जब यह राशि परिवर्तन करता है तो लोकतांत्रित पद्दति से चलने वाले देशों में बहुत बड़े सत्ता परिवर्तन की स्थिति भी पैदा करता है। साथ ही शासन व्यवस्था के साथ आम जनता की मानसिक स्थिति में भी बदलाव देखने को मिलता है। प्राकृतिक प्रकोप भी देता है। जहां बारिश नहीं हो रही हो वहां अतिवृष्टि और जहां अत्यधिक बारिश हो रही है वहां सूखे की स्थिति भी ला देता है। इसलिए यह अभावग्रस्त को परिपूर्ण तथा परिपूर्ण को आइना दिखा देता है। शनि से बहुत डरने की जरूरत नहीं है। शनि वृद्ध और न्यायप्रीय है। यह जब भी राशि परिवर्तन करता है तो वृद्ध और बालकों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। 

सोने-चांदी की कीमतों पर भी लाएगा असर
शनि धातुओं को भी बहुत प्रभावित करता है। शनि अभी मीन राशि में आ रहा है। मीन राशि का स्वामी बृहस्पति स्वर्ण का अधिष्ठाता है। इसलिए आने वाले दिनों में धातुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है।

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