राजस्थान के किसानों से एमएसपी पर बाजरे की खरीद का मुद्दा शुक्रवार को विधानसभा में गूंजा। निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने इसे लेकर प्रश्नकाल में सवाल पूछा। सरकार की तरफ से जवाब देते हुए मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि बाजारे की खरीद पर विचार कर रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली तथा लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों से एमएसपी पर बाजारे की खरीद का वादा किया है। कांग्रेस विधायकों ने भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। विरोध जताते हुए कांग्रेस विधायक वेल में उतर गए। इससे नाराज स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
इसी बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले में जवाब देने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में किसानों को धरने देने पड़े थे। बाजरा भी 1400 रुपये में बेचना पड़ा था। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद शायद पहली बार बाजारे की फसल अब आएगी। उन्होंने कहा कि सवाल करते हो तो जवाब सुनने की भी जिम्मेदारी भी होने चाहिए। मंत्रीजी ने कहा कि आगामी बाजरे की फसल एमएसपी पर खरीदने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन इस बात पर भी विचार करना चाहिए, पांच साल में कितनी खरीद की गई।
हमारी सरकार जो बोलेगी वो हर शब्द पूरा करेंगे
भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसी की तरफ एक उंगली करते हैं तो चार आपकी तरफ उठेंगी। जवाब सुनिए, मंत्रीजी कह रहे हैं कि आगामी बाजरे की फसल एमएसपी पर खरीदने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय अनेक जगहों पर धरने देने पड़े थे। क्योंकि हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, यूपी में किसानों को बाजरे का समर्थन मूल्य 2300 रुपये मिल रहा था।
राजस्थान के किसानों को मजूबरी में 1400-1500 रुपये क्विंटल में बाजरा बेचना पड़ा था। आप आज यह बात कहते हैं, तो आरोप लगाने से पहले यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किसानों के साथ अन्याय किसने किया? मंत्रीजी का जवाब साफ था, हमारी सरकार जो कहेगी उसका हर शब्द पूरा करके दिखाएगी। हमारी सरकार विचार करेगी और बाजरे के लिए लाभ भी देगी।