राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक बयान जारी कर गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर लगे दो हजार करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। अमेरिकी प्रतिभूति विनिमय आयोग (SEC) की जांच के हवाले से उन्होंने कहा कि अडानी समूह ने भारत में उच्च-मूल्य वाले सौर ऊर्जा अनुबंधों को हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई थी।
अमेरिकी कानून के तहत अपराध
डोटासरा ने बताया कि अमेरिकी अभियोग के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच अडानी समूह ने रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किया। यह मामला अमेरिकी कानून, विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) और संघीय प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन है।
भारत में महंगी बिजली और शेयर बाजार में हेरफेर
डोटासरा ने कहा कि अडानी समूह की गतिविधियों के कारण उपभोक्ताओं को महंगी दरों पर सौर ऊर्जा खरीदनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयले और बिजली उपकरणों के दाम बढ़ाकर दिखाने से भी बिजली की दरें दोगुनी हो गईं। इसके अलावा, अडानी समूह ने शेयर बाजार में हेरफेर कर भारतीय निवेशकों को नुकसान पहुंचाया।
सेबी और अन्य एजेंसियों पर सवाल
कांग्रेस ने सेबी (SEBI) की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा के बावजूद सेबी 20 महीने बाद भी जांच पूरी नहीं कर पाई। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सेबी की अध्यक्ष माधबी बुच के अडानी के साथ संबंधों के कारण जांच धीमी हुई।
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग
कांग्रेस ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग की है। डोटासरा ने कहा कि अगर विपक्षी नेताओं को मामूली आरोपों पर जेल भेजा जा सकता है, तो प्रधानमंत्री के करीबी सहयोगी पर 2 हजार करोड़ रुपये के गंभीर आरोपों के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा, "क्या अडानी को कानून से ऊपर रखा गया है? क्यों सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है, जबकि इतने बड़े आर्थिक घोटालों पर चुप्पी साधी जा रही है?" इस बयान के जरिए कांग्रेस ने अपने अभियान "हम अडानी के हैं कौन" को और मजबूत करते हुए सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया।