जयपुर के नवनिर्वाचित मेयर सुनील कोठारी की पहली मैराथन बैठक
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नगर निगम जयपुर के महापौर सुनील कोठारी ने पदभार ग्रहण करने के बाद मंगलवार को निगम मुख्यालय में पहली मैराथन बैठक की। तीन घंटे से अधिक चली बैठक में महापौर ने निगम की 15 से अधिक शाखाओं के कामकाज की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में राजस्व, कार्मिक, स्वास्थ्य, उद्यान, प्रोजेक्ट, गैराज और विधि शाखा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से वर्तमान कार्यों, लंबित प्रकरणों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी ली गई।
बैठक में उपमहापौर सरोज कंवर, अतिरिक्त आयुक्त नरेंद्र कुमार बंसल, उपायुक्त स्वास्थ्य ओम थानवी, मुख्य अभियंता अनिल सिंघल सहित जोन उपायुक्त और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्त निर्देश
बैठक में अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मुद्दा प्रमुखता से उठा। महापौर सुनील कोठारी ने जोन उपायुक्तों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि चारदीवारी क्षेत्र और जयपुर की विरासत के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण रोकने और अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए।
सफाई व्यवस्था की भी बारीकी से समीक्षा
महापौर ने सफाई व्यवस्था की भी बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जयपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी सभी की है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘एक सोच-एक डोर’ के साथ टीम भावना से काम करने और शहर की तस्वीर बदलने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
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पुरोहित जी कटले की आग पर भी चर्चा
पुरोहित जी कटले में लगी आग के कारणों को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि यदि उपकरण और संसाधन समय पर उपयोग में नहीं आते हैं तो उनकी उपयोगिता पर सवाल उठता है। उन्होंने व्यवस्थाओं में रही कमियों का विश्लेषण करने और जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
अवैध मीट-मांस की दुकानों और बेसहारा पशुओं पर कार्रवाई
महापौर ने अवैध मीट-मांस की दुकानों पर प्रभावी कार्रवाई और सड़कों पर घूम रहे बेसहारा एवं निराश्रित पशुओं की समस्या के शीघ्र समाधान के निर्देश भी दिए।
फील्ड में नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
उन्होंने फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग पर जोर देते हुए अधिकारियों से कहा कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें। अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें और जमीनी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता तथा प्रगति सुनिश्चित करें।