जयपुर नगर निगम में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। अब असली सियासी मुकाबला उस कुर्सी को लेकर है, जिसके लिए चुनाव से पहले ही भाजपा के भीतर समीकरण साधे जा रहे थे। नतीजे आने के साथ ही मेयर पद के दावेदारों को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस दौड़ में एक नाम पहले से ही काफी आगे था-सुनील कोठारी।
पार्टी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि टिकट वितरण के दौरान ही मेयर को लेकर मोटे तौर पर दो बातें तय मानी जा रही थीं। पहली, इस बार जयपुर में भाजपा महिला मेयर का प्रयोग नहीं करेगी। दूसरी, मेयर पद के लिए जैन समाज से चेहरे को आगे किया जाएगा। यही वजह है कि टिकट वितरण के समय ही कुछ नेताओं को यह संकेत मिल गया था कि चुनाव के बाद मेयर की कुर्सी के लिए किन नामों पर विचार होना है।
टिकट के साथ ही शुरू हो गया था मेयर का खेल?
भाजपा में मेयर पद के लिए मुख्य रूप से दो नाम लंबे समय से चर्चा में रहे-वार्ड-112 से जीते सुनील कोठारी और वार्ड-76 से जीतकर आए पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट। दोनों जैन समाज से आते हैं और दोनों के पास संगठन तथा नगर निगम की राजनीति का अनुभव है।
हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद कोठारी का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, टिकट मिलने से पहले से ही उन्हें मेयर पद के संभावित चेहरे के तौर पर देखा जा रहा था। अब वार्ड-112 से उनकी जीत ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
कोठारी के पक्ष में सबसे मजबूत संकेत क्यों
पार्टी सूत्रों के अनुसार निकाय चुनावों से पहले कोठारी को राज्य सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री बनाए जाने की तैयारी हो चुकी थी। उन्हें सचिवालय में कमरा और मंत्रियों वाली तमाम सुविधाएं मिलना भी तय हो चुका था। लेकिन प्रदेश में निकाय चुनावों के चलते यह फैसला रोक दिया गया। उन्हें पार्षद का टिकट दिया गया और वे चुनाव भी जीत गए। अब ज्यादा संभावना इसी बात की है कि कोठारी जयपुर के अगले मेयर बनाए जाएं।
कर्णावट का अनुभव, लेकिन कोठारी का संगठन भारी?
कोठारी के सामने सबसे मजबूत चुनौती पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट की है। कर्णावट पहले नगर निगम में डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें निगम की कार्यप्रणाली और पार्षदों के बीच काम करने का सीधा अनुभव है। लेकिन राजनीतिक मुकाबला सिर्फ निगम का अनुभव बनाम संगठन का अनुभव नहीं है। मेयर का चुनाव पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन, प्रदेश नेतृत्व की पसंद और पार्षदों के समर्थन से तय होगा। इस लिहाज से कोठारी की संगठन में पुरानी पकड़ उन्हें बढ़त देती दिखाई दे रही है।
वैश्य समाज भी कर रहा दावेदारी
हालांकि अलग-अलग समाजों के भीतर दावेदारे के कार्ड तो खेले ही जा रहे हैं। मेयर पद के लिए वैश्य समाज से भी कई नाम सामने हैं। इनमें वार्ड-98 से जीते सुभाष सिंघी, वार्ड-135 के विमल अग्रवाल और वार्ड-121 के नीरज अग्रवाल शामिल हैं। वैश्य समाज का राजनीतिक दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जयपुर में भाजपा की ओर से इस समाज के कई नेता मेयर रह चुके हैं। ऐसे में समाज की ओर से एक बार फिर प्रतिनिधित्व की मांग स्वाभाविक रूप से सामने आ रही है।
ब्राह्मण और राजपूत कार्ड भी सक्रिय
मेयर की दौड़ अब केवल जैन और वैश्य समाज तक सीमित नहीं है। वार्ड-43 से जीते पूर्व जयपुर शहर अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव के नाम के जरिए ब्राह्मण समाज भी अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश में है। वहीं वार्ड-14 से जीते दिग्विजय सिंह का नाम राजपूत समाज की ओर से सामने आया है। उनकी पत्नी दुर्गेश नंदनी पहले दो बार पार्षद रह चुकी हैं।