दिवाली से पहले जयपुर के घने बाजारों में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने चिंता जताई है। आयोग ने सवाल उठाया है कि अगर बाजारों में आग लगती है तो उसे बुझाने के लिए पर्याप्त पानी, दमकल की गाड़ियां और जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं। आयोग ने अधिकारियों से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही भीड़भाड़ वाले बाजारों से पटाखों की दुकानों को हटाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
आयोग के एकलपीठ अध्यक्ष न्यायमूर्ति जीआर मूलचंदानी ने दो नवंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसमें जयपुर के नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त, पुलिस आयुक्त और मुख्य अग्निशमन अधिकारी से जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई छह नवंबर को दोपहर साढ़े बारह बजे होगी।
बड़ी आग लगी तो पानी कहां से आएगा?
आयोग ने हाल ही बड़ी चौपड़ के पास पुरुषोत्तमजी का कटला में लगी आग का जिक्र करते हुए दमकल व्यवस्था पर सवाल उठाए। आयोग के अनुसार, आग बुझाने के दौरान पर्याप्त पानी नहीं मिलने की बात सामने आई थी। इस क्षेत्र से घाटगेट दमकल केंद्र की दूरी भी करीब दो से ढाई किलोमीटर है। ऐसे में आयोग ने पूछा है कि दमकल की गाड़ियों में पर्याप्त पानी रहता है या नहीं और आग लगने पर तुरंत पानी की व्यवस्था कैसे होगी।
आयोग ने ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक लिफ्ट और सीढ़ियों जैसे उपकरणों की उपलब्धता पर भी जानकारी मांगी है। उसका कहना है कि पुराने और घने बाजारों में आग लगने पर दमकलकर्मियों को काफी मुश्किल हो सकती है।
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भीड़भाड़ वाले बाजारों में पटाखों की दुकानें भी चिंता
आयोग ने जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार, बड़ी चौपड़, रामगंज बाजार और इंदिरा बाजार में पटाखों की दुकानों और उनके पास रखे जाने वाले पटाखों की बड़ी मात्रा पर भी चिंता जताई है। आयोग ने कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों में पटाखों की बिक्री और भंडारण से बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में इन दुकानों को भीड़भाड़ वाले बाजारों से दूर करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
बिना फायर एनओसी के चल रहे थे प्रतिष्ठान
मुख्य अग्निशमन अधिकारी शुभम शर्मा ने आयोग को बताया कि हाल की आग से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों के पास अग्निशमन सुरक्षा की एनओसी नहीं थी। इस संबंध में नोटिस भी जारी किए गए हैं। आयोग ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बाजारों में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम हों और पटाखों की बिक्री तय सुरक्षा नियमों के अनुसार ही हो।
आयोग ने अजमेर के नाज होटल में आग से दो लोगों की मौत, एसएमएस अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में आग और जयपुर के खो नागोरियान में पटाखों से जुड़े हादसे का भी उल्लेख किया। आयोग ने चेताया है कि अगर जरूरी संसाधनों की कमी या अधिकारियों की लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा होता है तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।