भू-माफिया पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अफसर ही घेरे में
- फोटो : Amar Ujala
राजधानी जयपुर में टोंक रोड स्थित वसुंधरा कॉलोनी की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कथित अवैध कब्जे के प्रयास के बाद शुरू हुई पुलिस कार्रवाई अब पुलिस विभाग के भीतर ही चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। भूमाफिया और हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों पर ही कार्रवाई होने से मामला डीजीपी स्तर तक पहुंच गया है।
100 करोड़ की जमीन पर कब्जे का आरोप
जानकारी के अनुसार वसुंधरा कॉलोनी में सत्यनारायण मीणा की करीब एक बीघा जमीन पर बने मकानों और दुकानों पर 30 मार्च 2026 को कथित कब्जे की कोशिश की गई। आरोप है कि भूमाफिया ने अशोक नगर थाने के हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों की मदद से संपत्ति के ताले तुड़वाकर कब्जा जमाने का प्रयास किया। मामले की सूचना मिलने पर बजाज नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
हिस्ट्रीशीटर समेत तीन लोग हिरासत में
मालवीय नगर एसीपी के निर्देशन में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया। शुरुआती तौर पर इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध कब्जे को रोकने की दिशा में अहम कदम माना गया, लेकिन बाद में मामला नया मोड़ लेता दिखाई दिया।
पुलिस अधिकारियों से मांगा गया जवाब
सूत्रों के मुताबिक एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं पर सवाल उठाए। इसके बाद एसीपी मालवीय नगर, एसीपी सदर और बजाज नगर थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसी बीच पुलिस आयुक्त ने बजाज नगर थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई।
ये भी पढ़ें-
जयपुर के SMS अस्पताल को बम से उड़ाने की धमकी: 40 करोड़ मांगे, मचा हड़कंप
विभाग में चर्चा, डीजीपी ने मांगी रिपोर्ट
थाना प्रभारी पर हुई कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग के भीतर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ पुलिसकर्मियों का मानना है कि भूमाफिया और आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर ही कार्रवाई होना गलत संदेश दे सकता है।वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई की वैधता और कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सूत्रों के अनुसार अब डीजीपी ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई नियमों के तहत हुई थी या कहीं अधिकारों का दुरुपयोग किया गया।